ट्रम्प को हर महीने बजट का हिसाब देगी वेनेजुएला सरकार

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वॉशिंगटन, 29 जनवरी 2026 । वर्तमान अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में वेनेजुएला और अमेरिका के बीच कूटनीति और वित्तीय प्रबंधन को लेकर एक दुर्लभ लेकिन महत्वपूर्ण समझौता सामने आया है। अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने संयुक्त राज्य अमेरिका की सीनेट में बयान दिया कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अब अपने मासिक बजट को अमेरिकी प्रशासन को प्रस्तुत करेगी, और ट्रंप प्रशासन के निरीक्षण के अधीन ही खर्च के लिए धन जारी किया जाएगा। यह व्यवस्था तेल की बिक्री से प्राप्त राजस्व के प्रबंधन का हिस्सा है, जिसे पहले कतर के एक अलग खाते में रखा जाएगा और फिर अमेरिकी ट्रेजरी के नियंत्रण में ट्रांसफर किया जाएगा।

वेनेजुएला की अंतरिम सरकार हर महीने अमेरिका को बजट का हिसाब देगी। यानी कि उन्हें यह बताना होगा कि महीनेभर में उसे पैसे कहां-कहां खर्च करने हैं। इसके बदले में अमेरिका उस पैसे को रिलीज करेगा, जो वेनेजुएला के तेल बेचने से मिला है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने यह जानकारी बुधवार को संसद में दी। रुबियो ने बताया कि अभी शुरुआत में यह पैसा जिस खाते में रखा जाएगा, उसे कतर संभालेगा इसपर डेमोक्रेट सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई।

डेमोक्रेट सांसदों ने कहा कि कतर वेनेजुएला से हजारों मील दूर है और यह साफ नहीं है कि यह व्यवस्था कानूनी और पारदर्शी कैसे है। उन्होंने यह भी कहा कि कतर के शासक को राष्ट्रपति ट्रम्प का करीबी माना जाता है, इसलिए शक और बढ़ता है।

रुबियो ने कहा कि कतर को पैसा भेजना इसलिए जरूरी है क्योंकि वेनेजुएला पर अमेरिकी प्रतिबंध हैं। इसके अलावा अगर पैसा सीधे आया तो वेनेजुएला को पैसा देने वाले अमेरिकी लोग उस पर कानूनी दावा कर सकते हैं। ये वही ऊर्जा कंपनियां हैं जिनकी संपत्ति करीब 20 साल पहले वेनेजुएला ने जब्त कर ली थीं। यह कदम केवल आर्थिक निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि भारी राजनीतिक और कूटनीतिक मायने रखता है। अमेरिका ने वेनेजुएला की तेल संपत्ति और राजस्व पर नियंत्रण के लिए यह अनुकूल मॉडल अपनाया है ताकि तेल बिक्री से होने वाली आय को न्यायसंगत, पारदर्शी और राजनीतिक पूर्वाग्रह से मुक्त तरीके से खर्च किया जा सके। रुबियो ने बताया कि इस प्रक्रिया को “फिस्कल क्रंच” (आर्थिक संकट) का समाधान और सार्वजनिक सेवाओं जैसे पुलिस, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करने के उद्देश्य से लागू किया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह पद्धति कई मायनों में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि आर्थिक नियंत्रण और निगरानी अब सैन्य या कूटनीतिक दबाव के अलावा वित्तीय पारदर्शिता के नाम पर भी हो सकती है — खासकर उस देश के मामलों में जहां राजनीतिक अस्थिरता और नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया चल रही हो।

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