देश का ‘आर्थिक रिपोर्ट कार्ड’ संसद में पेश

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नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026 ।  संसद में पेश किए गए देश के ताज़ा ‘आर्थिक रिपोर्ट कार्ड’ ने भारत की अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति, उपलब्धियों और चुनौतियों की व्यापक तस्वीर सामने रखी। यह रिपोर्ट न सिर्फ बीते वित्तीय वर्ष के प्रदर्शन का आकलन करती है, बल्कि आने वाले समय के लिए नीति-निर्माताओं की दिशा और प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट करती है। सरकार ने इसे भारत की बढ़ती वैश्विक आर्थिक भूमिका और घरेलू सुधारों का प्रतिबिंब बताया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 29 जनवरी को देश का ‘आर्थिक रिपोर्ट कार्ड’ यानी इकोनॉमिक सर्वे लोकसभा में पेश किया। इस सर्वे में बताया गया है पिछले एक साल में महंगाई ने आपकी थाली पर कितना असर डाला, खेती-किसानी की क्या हालत है और क्या आने वाले समय में आपके लिए नई नौकरियां बढ़ेंगी या नहीं।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत विश्व की प्रमुख तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए हुए है। विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और डिजिटल अर्थव्यवस्था में विस्तार ने विकास दर को सहारा दिया है। बुनियादी ढांचे—जैसे सड़क, रेल, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स—पर बढ़ा पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) आर्थिक गतिविधियों को गति देने वाला प्रमुख कारक बना है। सरकारी निवेश का उद्देश्य निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करना और रोजगार सृजन को बढ़ाना है।

महंगाई पर नियंत्रण को भी रिपोर्ट में अहम उपलब्धि के रूप में पेश किया गया। खाद्य और ईंधन कीमतों में वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद आपूर्ति प्रबंधन, निर्यात-आयात नीतियों और मौद्रिक उपायों ने संतुलन बनाए रखने में भूमिका निभाई। वहीं, राजकोषीय घाटे को चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई, ताकि विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बना रहे।

रोजगार और कौशल विकास को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए गए। स्टार्टअप इकोसिस्टम, डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित काम और एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने वाली नीतियों ने नए अवसर पैदा किए हैं। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के जरिए इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, ऑटो कंपोनेंट्स और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

हालांकि, रिपोर्ट ने कुछ चुनौतियों को भी रेखांकित किया। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला बाधाएं और जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिम विकास की गति को प्रभावित कर सकते हैं। ग्रामीण मांग को मजबूत करना, कृषि क्षेत्र में आय स्थिरता, और शहरी-ग्रामीण असमानताओं को कम करना नीति के प्रमुख फोकस क्षेत्र बताए गए हैं।

ग्रीन ग्रोथ और सतत विकास भी इस आर्थिक दृष्टि का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, हरित हाइड्रोजन और जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में निवेश को भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार माना गया है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर—जैसे डिजिटल भुगतान और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर—ने पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में योगदान दिया है।

कुल मिलाकर, संसद में पेश यह ‘आर्थिक रिपोर्ट कार्ड’ एक मिश्रित लेकिन आशावादी तस्वीर पेश करता है—जहां मजबूत विकास संभावनाएं हैं, पर सतर्क नीतिगत प्रबंधन की भी जरूरत है। यह दस्तावेज़ आने वाले बजट और आर्थिक निर्णयों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

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