यूरोपीय यूनियन ने भारत से रक्षा समझौते को मंजूरी दी

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ब्रुसेल्स , 22 जनवरी 2026 । यूरोपीय यूनियन (EU) ने भारत के साथ एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते को मंजूरी देकर दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस फैसले को भारत-यूरोप संबंधों में ऐतिहासिक मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि यह सिर्फ रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा, तकनीक, इंडो-पैसिफिक स्थिरता और वैश्विक भू-राजनीति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

यूरोपीय यूनियन (EU) ने भारत के साथ नए रक्षा समझौते (सिक्योरिटी और डिफेंस एग्रीमेंट) को मंजूरी दे दी है। अगले हफ्ते नई दिल्ली में होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन में इस पर साइन होंगे।

EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने बुधवार को यूरोपीय संसद में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा यह साझेदारी एक बड़े रणनीतिक एजेंडे का हिस्सा होगी।

इस एजेंडे में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी मुक्त व्यापार समझौता (FTA), डिफेंस एंड सिक्योरिटी डील, साइबर सिक्योरिटी, समद्री सुरक्षा और काउंटर टेररिज्म शामिल है।

यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत आ रहे हैं। वे 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। भारत-EU शिखर सम्मेलन अगले दिन 27 जनवरी को होगा।

यूरोपीय यूनियन का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व में तनाव और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन को लेकर बढ़ती चिंता के बीच EU भारत को एक विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है। भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता, स्थिर लोकतांत्रिक व्यवस्था और स्वतंत्र विदेश नीति यूरोप के लिए उसे एक अहम सहयोगी बनाती है।

भारत के नजरिए से यह समझौता भी बेहद अहम है। इससे भारत को उन्नत रक्षा तकनीक, आधुनिक हथियार प्रणालियों तक पहुंच और वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान मिलने की संभावना है। इसके साथ ही समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग बढ़ने से भारत की सामरिक स्थिति और मजबूत होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रक्षा समझौता भारत-यूरोप संबंधों को पारंपरिक व्यापार और कूटनीति से आगे ले जाकर रणनीतिक और सुरक्षा साझेदारी में बदल देगा। इससे न केवल द्विपक्षीय रिश्ते मजबूत होंगे, बल्कि एशिया और यूरोप दोनों क्षेत्रों में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

कुल मिलाकर, यूरोपीय यूनियन द्वारा भारत के साथ रक्षा समझौते को मंजूरी देना बदलते वैश्विक हालात में भारत की बढ़ती भूमिका और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी रणनीतिक विश्वसनीयता का स्पष्ट संकेत है।

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