नुउक, 19 जनवरी 2026 । हाल के वर्षों में ग्रीनलैंड अचानक दुनिया की बड़ी शक्तियों की नजर में आ गया है। बर्फ से ढका यह विशाल द्वीप अब सिर्फ भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि भूराजनीति, प्राकृतिक संसाधनों और वैश्विक सुरक्षा रणनीति का अहम मोर्चा बन चुका है। अमेरिका, चीन, रूस और यूरोपीय देशों की बढ़ती दिलचस्पी ने ग्रीनलैंड को दुनिया का नया हॉटस्पॉट बना दिया है।
अमेरिका और रूस के बीच मौजूद ग्रीनलैंड अब धीरे-धीरे बहुत अहम इलाका बनता जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है दुनिया का गर्म होना और आर्कटिक में बर्फ का पिघलना। जब बर्फ कम हो रही है, तो वहां नए समुद्री रास्ते खुल रहे हैं और जमीन के नीचे छिपे संसाधन भी सामने आ रहे हैं।
इसी वजह से ग्रीनलैंड अब सेना, कारोबार और प्राकृतिक संसाधनों के लिहाज से पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रीनलैंड दुर्लभ खनिजों के मामले में दुनिया में आठवें स्थान पर है और यहां लगभग 15 लाख टन खनिज भंडार होने का अनुमान है।
ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल में भी ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जताई थी। तब इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। इसे सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी या दिखावा मानकर नजरअंदाज कर दिया था। अब हालात काफी बदल चुके हैं। ट्रम्प अब इस पर कब्जा करने की धमकी दे रहे हैं। अब इसे गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
चीन और रूस की बढ़ती मौजूदगी
चीन ग्रीनलैंड में निवेश और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, जबकि रूस आर्कटिक में अपनी सैन्य और ऊर्जा गतिविधियों को लगातार बढ़ा रहा है। इससे ग्रीनलैंड एक तरह से महाशक्तियों के टकराव का संभावित मैदान बनता जा रहा है।
डेनमार्क और स्थानीय राजनीति का दबाव
ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन स्वायत्त क्षेत्र है, लेकिन यहां स्वतंत्रता की मांग भी समय-समय पर उठती रहती है। वैश्विक शक्तियों की दिलचस्पी ने स्थानीय राजनीति को और जटिल बना दिया है। डेनमार्क को अब संतुलन बनाकर चलना पड़ रहा है—एक तरफ सुरक्षा, दूसरी तरफ ग्रीनलैंड की स्वायत्त आकांक्षाएं।
जलवायु परिवर्तन का असर
जलवायु परिवर्तन ने ग्रीनलैंड को सिर्फ पर्यावरणीय चिंता का विषय नहीं रखा, बल्कि उसे रणनीतिक अवसर में भी बदल दिया है। नई समुद्री राहें, संसाधनों की उपलब्धता और वैज्ञानिक शोध—सबने इसकी अहमियत कई गुना बढ़ा दी है।
ग्रीनलैंड अब सिर्फ बर्फ का टापू नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक राजनीति का केंद्र बनता जा रहा है। आने वाले वर्षों में यहां महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है, जिससे यह इलाका दुनिया के सबसे संवेदनशील भू-राजनीतिक क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।
