अमेरिकी धमकी के बाद 7 देशों के सैनिक ग्रीनलैंड पहुंचे

Date:

नुउक, 19 जनवरी 2026 । ग्रीनलैंड एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है। अमेरिकी चेतावनी और सख्त रुख के बाद 7 देशों के सैनिक ग्रीनलैंड पहुंच गए हैं, जिससे आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा और सैन्य संतुलन को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब ग्रीनलैंड की रणनीतिक अहमियत को लेकर अमेरिका, रूस और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकियों के बाद यूरोपीय देश एकजुट हो गए हैं। कई NATO सदस्य देशों ने ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस नाम से एक संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किया है।

इसके लिए यूरोपीय देशों में फ्रांस ने 15 सैनिक ग्रीनलैंड भेजे हैं, जो 27वीं माउंटेन इन्फैंट्री ब्रिगेड से हैं। जर्मनी ने 13 सैनिकों की एक टीम भेजी है। नॉर्वे, नीदरलैंड और फिनलैंड ने दो-दो सैनिक तैनात किए हैं।

ब्रिटेन ने एक सैन्य अधिकारी भेजा है। स्वीडन ने भी सैनिक भेजने की पुष्टि की है, हालांकि संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है। कुल मिलाकर, डेनमार्क के मौजूदा सैनिकों के अलावा यूरोपीय देशों से लगभग 35-40 सैन्य कर्मी पहुंचे हैं। वहीं, इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेत्तो ने इस पूरे ऑपरेशन को मजाक जैसा बताया है।

रूस और चीन की गतिविधियों पर नजर
पश्चिमी देशों का मानना है कि आर्कटिक में रूस की सैन्य मौजूदगी और चीन की आर्थिक दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। इसी वजह से ग्रीनलैंड में बहुराष्ट्रीय सैनिकों की मौजूदगी को पावर बैलेंस बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। यह कदम अमेरिका की उस नीति से जुड़ा माना जा रहा है, जिसमें वह आर्कटिक को भविष्य का रणनीतिक मोर्चा मानता है।

डेनमार्क और ग्रीनलैंड का रुख
ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन स्वायत्त क्षेत्र है। डेनमार्क सरकार का कहना है कि सभी सैन्य गतिविधियां आपसी सहमति और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत हो रही हैं। वहीं ग्रीनलैंड के स्थानीय प्रशासन ने भी सुरक्षा जरूरतों को समझते हुए सहयोग की बात कही है, हालांकि स्थानीय स्तर पर बाहरी सैन्य मौजूदगी को लेकर बहस भी तेज हो रही है।

वैश्विक संकेत क्या हैं
विशेषज्ञों के अनुसार, 7 देशों के सैनिकों का ग्रीनलैंड पहुंचना इस बात का संकेत है कि आर्कटिक अब सिर्फ पर्यावरण या व्यापार का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि भविष्य का संभावित सैन्य और भू-राजनीतिक टकराव क्षेत्र बनता जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related