सबरीमाला गोल्ड विवाद, मंदिर के मुख्य पुजारी गिरफ्तार

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तिरुवनंतपुरम, 09 जनवरी 2026 ।  केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से जुड़े गोल्ड विवाद ने अब गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मामले में मंदिर के मुख्य पुजारी की गिरफ्तारी के बाद धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रतिष्ठित मंदिर में सोने और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर उठे सवालों ने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़े सोना गायब होने के मामले में राज्य की विशेष जांच टीम ( SIT) ने शुक्रवार को मुख्य पुजारी कंदरारु राजीवरु को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसी का कहना है कि उनका मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी से करीबी संबंध था।

जांच में सामने आया है कि भगवान अयप्पा मंदिर में द्वारपालक मूर्तियों और श्रीकोविल की सोने की प्लेटों की विवादित खरीद की सिफारिश में भी उनकी भूमिका थी। इस मामले में यह 11वीं गिरफ्तारी है।

इधर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ED की कोच्चि जोनल यूनिट ने इस मामले में PMLA के तहत ECIR दर्ज की है। केरल हाईकोर्ट ने दिसंबर में SIT की आपत्ति खारिज करते हुए ED को स्वतंत्र जांच की अनुमति दी थी।

सबरीमाला मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र माना जाता है। हर साल बड़ी मात्रा में सोना, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं चढ़ावे के रूप में मंदिर को प्राप्त होती हैं। ऐसे में गोल्ड मैनेजमेंट में किसी भी तरह की गड़बड़ी को बेहद गंभीर माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की जड़ तक पहुंचने के लिए वित्तीय रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और पूर्व लेन-देन की गहन जांच की जा रही है।

मुख्य पुजारी की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ संगठनों ने इसे कानून का निष्पक्ष पालन बताया है, जबकि कुछ धार्मिक समूहों ने मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। श्रद्धालुओं के बीच भी इस खबर को लेकर चिंता और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

राज्य सरकार और मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और जांच पूरी होने तक सभी आरोपों की निष्पक्ष तरीके से पड़ताल की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, अगर इस मामले में और लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

सबरीमाला गोल्ड विवाद ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों के प्रशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच किस दिशा में जाती है, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।

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