अडाणी का ₹1,000 करोड़ का बॉन्ड सिर्फ 45-मिनट में भरा

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नई दिल्ली, 06 जनवरी 2026 । अडाणी समूह ने एक बार फिर पूंजी बाजार में अपनी मजबूत पकड़ और निवेशकों के भरोसे को साबित कर दिया है। समूह द्वारा जारी किया गया ₹1,000 करोड़ का बॉन्ड इश्यू सिर्फ 45 मिनट में पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। इतनी तेज़ी से बॉन्ड का भर जाना इस बात का संकेत है कि घरेलू और संस्थागत निवेशकों के बीच अडाणी समूह की वित्तीय स्थिति और भविष्य की योजनाओं को लेकर विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।

अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) का ₹1,000 करोड़ का बॉन्ड सिर्फ 45 मिनट में ही पूरा सब्सक्राइब हो गया। इसमें निवेशकों को 8.9% तक का सालना ब्याज मिलेगा।

कंपनी का यह नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCD) यानी पब्लिक इश्यू मंगलवार (6 जनवरी) को सुबह 10 बजे खुला था। स्टॉक एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, ₹500 करोड़ का बेस इश्यू तो शुरुआती 10 मिनट में ही भर गया था।

इसके बाद ग्रीन-शू ऑप्शन के तहत बाकी ₹500 करोड़ के लिए भी एक घंटे से कम समय में ही बोलियां लग गईं। कंपनी इस फंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से अपना पुराना कर्ज चुकाने और बिजनेस विस्तार के लिए करेगी।

अडाणी समूह के इस बॉन्ड को सुरक्षित और आकर्षक रिटर्न वाला निवेश विकल्प माना गया। खासतौर पर ऐसे समय में जब निवेशक स्थिर और भरोसेमंद रिटर्न की तलाश में रहते हैं, तब बड़े कॉरपोरेट बॉन्ड्स की मांग तेजी से बढ़ती है। इस इश्यू में भी यही रुझान देखने को मिला, जहां बड़े निवेशकों के साथ-साथ हाई-नेटवर्थ इंडिविजुअल्स ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

विशेषज्ञों के मुताबिक, 45 मिनट में पूरा इश्यू सब्सक्राइब होना यह दर्शाता है कि बाजार अब अडाणी समूह की दीर्घकालिक रणनीति पर भरोसा जता रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी, पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर्स में समूह की मजबूत मौजूदगी निवेशकों के लिए एक बड़ा भरोसे का कारण बनी है। इसके अलावा, समय पर कर्ज चुकाने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की छवि ने भी निवेशकों को आकर्षित किया।

इस सफल बॉन्ड इश्यू के बाद माना जा रहा है कि अडाणी समूह को भविष्य में फंड जुटाने में और आसानी होगी। साथ ही यह घटनाक्रम भारतीय कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट के लिए भी सकारात्मक संकेत है, जहां मजबूत कंपनियों के प्रति निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है।

कुल मिलाकर, ₹1,000 करोड़ का बॉन्ड महज 45 मिनट में भर जाना न सिर्फ अडाणी समूह की साख को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भारतीय पूंजी बाजार में बड़े औद्योगिक समूहों के प्रति निवेशकों का भरोसा कायम है।

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