कर्नाटक सरकार के सर्वे में दावा-91% ने माना चुनाव निष्पक्ष

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नई दिल्ली, 02 जनवरी 2026 । कर्नाटक सरकार द्वारा कराए गए एक हालिया सर्वे में दावा किया गया है कि राज्य में हुए चुनावों को लेकर जनता का भरोसा मजबूत है। सर्वे के अनुसार, लगभग 91 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने यह माना कि चुनाव निष्पक्ष, पारदर्शी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप संपन्न हुए। सरकार का कहना है कि यह आंकड़ा राज्य की चुनावी व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर जनता के विश्वास को दर्शाता है।

कर्नाटक सरकार की एक एजेंसी की स्टडी में दावा किया गया है कि राज्य के 91% लोग मानते हैं कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराए जाते हैं और EVM सटीक नतीजे देती हैं। यह रिपोर्ट कर्नाटक मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन अथॉरिटी (KMEA) ने प्रकाशित की है।

यह सर्वे ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भाजपा पर कई राज्यों में ‘वोट चोरी’ का लगातार आरोप लगा रहे हैं। वे कर्नाटक के कलबुर्गी में भी वोट चोरी का दावा कर चुके हैं। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। ऐसे में भाजपा ने सर्वे रिपोर्ट को लेकर राहुल पर पलटवार किया है।

भाजपा नेता और कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘लोग चुनावों पर, EVM पर और लोग भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा करते हैं। यह सर्वे कांग्रेस के मुंह पर करारा तमाचा है। जहां नागरिक भरोसा दिखा रहे हैं, वहीं कांग्रेस शक जता रही है।’

कर्नाटक सरकार ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव का यह भरोसा लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है। सर्वे में शामिल लोगों ने यह भी माना कि चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने, मतदान केंद्रों पर सुविधाएं उपलब्ध कराने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई। खासतौर पर महिला मतदाताओं और पहली बार वोट करने वालों में भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है।

हालांकि, विपक्षी दलों ने इस सर्वे पर सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकारी सर्वे होने के कारण इसके निष्कर्षों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर संदेह किया जा सकता है। विपक्ष का तर्क है कि चुनावों से जुड़ी वास्तविक स्थिति जानने के लिए किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा अध्ययन किया जाना चाहिए। इसके बावजूद सरकार का कहना है कि सर्वे का उद्देश्य आत्ममूल्यांकन और व्यवस्था में सुधार के बिंदुओं को समझना है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह सर्वे ऐसे समय में सामने आया है, जब चुनावी पारदर्शिता और ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर देशभर में बहस होती रहती है। 91 प्रतिशत लोगों का चुनाव को निष्पक्ष मानना सरकार और चुनावी संस्थाओं के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि बाकी असंतुष्ट वर्ग की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए।

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