नया साल 2026, काशी-अयोध्या-वृंदावन में 10 लाख श्रद्धालु, 3km लाइनें

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नई दिल्ली, 31 दिसंबर 2025 । नए साल 2026 के स्वागत के साथ ही देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों काशी, अयोध्या और वृंदावन में आस्था का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। साल के पहले ही दिन इन तीनों पवित्र शहरों में करीब 10 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे, जिससे मंदिर परिसरों और आसपास के इलाकों में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं की कतारें 3 किलोमीटर तक लंबी देखी गईं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि नए साल की शुरुआत लोग आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ करना चाहते हैं।

नए साल से पहले देशभर के धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर लोगों का सैलाब सा उमड़ पड़ा है। अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए 2 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर में 3 लाख और वृंदावन में 4 लाख भक्त मौजूद हैं।

राजस्थान के जैसलमेर में पिछले 10 साल में सबसे ज्यादा भीड़ है। सीकर के खाटूश्यामजी में नए साल के मौके पर 72 घंटे दर्शन होंगे। उज्जैन के महाकाल लोक में कल साल के पहले दिन 12 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद घाटी में एक बार फिर से रौनक लौट आई है। पर्यटन स्थलों पर सैलानियों की भीड़ है। गुलमर्ग और पहलगाम जैसे विंटर डेस्टिनेशन में होटलों की बुकिंग करीब 100% तक पहुंच गई है।

अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए भी भारी भीड़ उमड़ी। नए साल के साथ-साथ राम मंदिर को देखने और प्रभु श्रीराम के दर्शन की चाह में देश के कोने-कोने से लोग पहुंचे। राम जन्मभूमि परिसर के बाहर कई किलोमीटर तक श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेडिकल टीम, पेयजल और स्वयंसेवकों की तैनाती की, ताकि किसी को परेशानी न हो।

वृंदावन में भी ठाकुर बांके बिहारी के दर्शन के लिए जबरदस्त भीड़ देखने को मिली। नए साल पर विशेष श्रृंगार और भजन-कीर्तन ने भक्तों के उत्साह को और बढ़ा दिया। मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक थी कि प्रवेश और निकास को अलग-अलग मार्गों से संचालित करना पड़ा। पुलिस और मंदिर प्रशासन ने मिलकर भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली।

कुल मिलाकर, नया साल 2026 काशी, अयोध्या और वृंदावन में श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम लेकर आया। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि भारत में आस्था आज भी लोगों के जीवन का केंद्रीय आधार है और नए साल की शुरुआत ईश्वर के चरणों में शीश नवाकर करने की परंपरा लगातार मजबूत हो रही है।

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