महाराष्ट्र निकाय चुनाव, NDA को 207 सीटें

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महाराष्ट्र , 22 दिसंबर 2025 । महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में एनडीए (NDA) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 207 सीटों पर जीत हासिल की है। इस नतीजे को राज्य की राजनीति में एक अहम संकेत माना जा रहा है, क्योंकि स्थानीय निकाय चुनावों को आम तौर पर जनभावनाओं और जमीनी समर्थन का पैमाना माना जाता है। एनडीए की इस सफलता ने विपक्षी दलों की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

महाराष्ट्र निकाय चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन (NDA) को बंपर जीत हासिल हुई है। 288 सीटों (246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों) के रिजल्ट में महायुति को 207 सीटों पर जीत मिली। रविवार रात तक स्टेट इलेक्शन कमीशन ने फाइनल रिजल्ट जारी कर दिए।

गठबंधन में भाजपा 117 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 53 सीटें, NCP अजित को 37 सीटें मिलीं। वहीं, विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन 44 सीटों तक सीमित रहा।

इसमें कांग्रेस कांग्रेस को 28 सीटें मिलीं, जबकि शरद पवार की NCP को केवल 7 और शिवसेना (UBT) को 9 सीटें हासिल हुईं। 32 सीटें अन्य को मिली हैं।

गढ़चिरौली में वार्ड नंबर 4 में बीजेपी उम्मीदवार संजय मंडवगड़े केवल एक वोट से चुनाव हार गए। लास्ट काउंटिंग के बाद उन्हें 716 वोट मिले। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी श्रीकांत देशमुख को 717 वोट मिले।

दरअसल, महाराष्ट्र की 288 नगर परिषदों और नगर पंचायत के लिए दो चरणों में चुनाव हुआ था। पहले चरण में 2 दिसंबर को 263 निकायों में मतदान हुआ था। बाकी 23 नगर परिषदों और कुछ खाली पदों पर 20 दिसंबर को वोटिंग हुई थी।

धुले की डोंडाइचा नगर परिषद और सोलापुर की उंगर नगर पंचायत में अध्यक्ष और सदस्यों का चुनाव निर्विरोध हुआ था। जलगांव जिले की जामनेर नगर परिषद में भी अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला नहीं हुआ था। तीनों पदों पर भाजपा ने निर्विरोध जीत हासिल की।

विपक्षी दलों के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का संकेत है। कई क्षेत्रों में बिखरे वोट और आपसी तालमेल की कमी का नुकसान उन्हें उठाना पड़ा। स्थानीय मुद्दों पर एकजुट और प्रभावी रणनीति न बना पाना भी हार के कारणों में गिना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निकाय चुनावों में 207 सीटों की जीत एनडीए के लिए आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले मनोबल बढ़ाने वाली है। यह परिणाम संगठनात्मक मजबूती, चुनाव प्रबंधन और नेतृत्व की स्वीकार्यता को दर्शाता है।

कुल मिलाकर, महाराष्ट्र निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई दिशा का संकेत दिया है। एनडीए की यह जीत केवल संख्या का आंकड़ा नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी मानी जा रही है।

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