पुतिन बोले- यूक्रेन NATO में शामिल होने की जिद छोड़े

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मॉस्को, 19 दिसंबर 2025 ।  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर यूक्रेन संकट को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अगर यूक्रेन वास्तव में शांति चाहता है, तो उसे NATO में शामिल होने की जिद छोड़नी होगी। पुतिन के इस बयान ने पूर्वी यूरोप में चल रहे लंबे संघर्ष और वैश्विक भू-राजनीति को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि यूरोपीय संघ (EU) की वह योजना, जिसे फिलहाल रोक दिया गया है और जिसमें रूस की जमी हुई संपत्तियों का इस्तेमाल यूक्रेन की रक्षा के लिए करने की बात थी, ‘सीधी लूट’ है। पुतिन ने चेतावनी दी कि अगर EU ने इस योजना को दोबारा आगे बढ़ाया तो इसके बहुत गंभीर नतीजे होंगे।

बता दें कि EU पहले यह सोच रहा था कि यूरोप में जमी रूस की संपत्तियों को सीधे लेकर यूक्रेन को दे दिया जाए। लेकिन कानूनी और राजनीतिक अड़चनों की वजह से इस पर सभी देश सहमत नहीं हो पाए। इसलिए यह योजना अभी के लिए टाल दी गई है, लागू नहीं की गई है।

यह पुतिन का 22वां सालाना संवाद है। इस दौरान वह आम लोगों और मीडिया के सवालों के जवाब दे रहे हैं। साथ ही साल 2025 में सरकार के कामकाज और देश से जुड़े बड़े मुद्दों पर अपनी बात रख रहे हैं।

पुतिन की सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस हर साल आयोजित होती है। बीते दो हफ्तों में इस कार्यक्रम के लिए बनाए गए कॉल सेंटर्स में 24.9 लाख से ज्यादा सवाल पहुंचे हैं।

रूसी राष्ट्रपति ने यह भी दोहराया कि अगर यूक्रेन तटस्थ देश का दर्जा अपनाने पर सहमत होता है और पश्चिमी सैन्य गठबंधनों से दूरी बनाता है, तो बातचीत और स्थायी शांति की संभावनाएं बन सकती हैं। पुतिन का कहना है कि युद्ध का समाधान सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक रास्ते से ही संभव है, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों को कुछ कठोर फैसले लेने होंगे।

दूसरी ओर, यूक्रेन और उसके पश्चिमी समर्थक देशों का रुख इससे अलग रहा है। उनका कहना है कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र को यह अधिकार है कि वह अपनी सुरक्षा और भविष्य को लेकर स्वतंत्र निर्णय ले। NATO सदस्यता को वे रूस के आक्रमण के खिलाफ सुरक्षा कवच के रूप में देखते हैं। इसी वजह से पुतिन का यह बयान पश्चिम और रूस के बीच पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर सकता है।

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन का यह बयान केवल यूक्रेन के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका और यूरोपीय देशों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है। रूस यह दिखाना चाहता है कि वह अपनी सुरक्षा को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा। साथ ही, यह बयान आने वाले समय में शांति वार्ता की शर्तों का संकेत भी देता है।

कुल मिलाकर, पुतिन के इस बयान से साफ है कि यूक्रेन संकट का समाधान अभी दूर है। NATO सदस्यता का मुद्दा इस संघर्ष का केंद्र बना हुआ है और जब तक इस पर कोई साझा सहमति नहीं बनती, तब तक पूर्वी यूरोप में अस्थिरता बनी रहने की आशंका है।

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