शहबाज शरीफ बोले-दिल्ली से मुंबई तक भारत हार नहीं भूलेगा

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नई दिल्ली, 18 दिसंबर 2025 । पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के एक बयान ने एक बार फिर भारत–पाक संबंधों को लेकर सियासी हलचल तेज कर दी है। शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में कहा कि “दिल्ली से मुंबई तक भारत हार नहीं भूलेगा,” जिस पर राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। इस बयान को भारत के खिलाफ सख्त और उकसावे भरे संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने बुधवार को कहा कि उनकी सेना ने भारत को कभी न भूलने वाला सबक दिया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली से मुंबई तक भारत इस हार का दर्द कभी नहीं भूलेगा।

शहबाज ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने देश की जनता की दुआओं से यह जीत हासिल की। उन्होंने ने यह बयान खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में हरिपुर यूनिवर्सिटी में दिया।

शहबाज ने दावा किया कि 87 घंटे तक चले इस संघर्ष में पाकिस्तान ने भारत के 6 लड़ाकू विमान गिराए, जिनमें तीन राफेल शामिल थे। साथ ही कई ड्रोन भी मार गिराए।

पाकिस्तानी PM ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हमला होने के इसके बाद भारत ने पाकिस्तान पर आरोप लगाते हुए सैन्य कार्रवाई की।

पहलगाम में 22 अप्रैल को टूरिस्टों पर आतंकवादी हमला हुआ, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। ये आतंकी पाकिस्तान से जुड़े थे।

शहबाज ने UN में 7 विमान गिराने का दावा किया था

शहबाज इससे पहले भी ऐसी बयानबाजी कर चुके हैं। हालांकि इससे पहले उन्होंने सितंबर में भारत के 7 विमान गिराने का दावा किया था। उन्होंने UN में दिए गए भाषण में भारत पर पाकिस्तान की जीत का दावा किया था।

शहबाज ने कहा कि उन्होंने पहलगाम हमले की निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच की अपील की थी, लेकिन भारत ने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि भारत का कट्टरपंथी हिंदुत्व दुनिया के लिए एक गंभीर खतरा है।

शरीफ ने कहा कि वे पिछले साल ही UN के मंच से चेतावनी दे चुके थे कि पाकिस्तान किसी बाहरी हमले को सहने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी चेतावनी सच साबित हुई। इस साल मई में बिना उकसावे के पाकिस्तान पर हमला हुआ।

भारत में इस बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कई नेताओं ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और भड़काऊ करार देते हुए कहा कि इस तरह के बयान दोनों देशों के बीच शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचाते हैं। उनका कहना है कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर पूरी तरह सतर्क है और किसी भी तरह की बयानबाजी से दबाव में आने वाला नहीं है।

कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान अक्सर वास्तविक नीति से ज्यादा राजनीतिक संदेश देने के लिए दिए जाते हैं। भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में पहले से मौजूद अविश्वास के माहौल में ऐसे शब्द तनाव को और बढ़ा सकते हैं। वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच संवाद और स्थिरता के लिए संयमित भाषा का इस्तेमाल जरूरी है।

फिलहाल, शहबाज शरीफ के इस बयान ने एक बार फिर भारत–पाक रिश्तों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस बयान का कूटनीतिक स्तर पर क्या असर पड़ता है और दोनों देशों की सरकारें इसे किस तरह से आगे बढ़ाती हैं।

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