दिल्ली सिक्योरिटी सिस्टम से लैस होगी, कैपिटल डोम तैयार

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नई दिल्ली, 16 दिसंबर 2025 ।  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था से लैस करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राजधानी में नए हाईटेक सिक्योरिटी सिस्टम को लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है, वहीं सुरक्षा ढांचे का अहम हिस्सा माने जा रहे ‘कैपिटल डोम’ को भी तैयार बताया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य दिल्ली की आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत बनाना, संवेदनशील इलाकों की निगरानी बढ़ाना और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।

देश की राजधानी दिल्ली चौतरफा सुरक्षा सिस्टम से लैस होने जा रही है। इसे कैपिटल डोम नाम दिया गया है। ऑपरेशन सिंदूर के वक्त पाकिस्तान ने दिल्ली पर मिसाइलें दागी थीं, लेकिन हमारे स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम ने इसे हवा में ही मार गिराया था।

इसी के बाद दिल्ली को अलग से एक ‘सुदर्शन चक्र’ का सुरक्षा घेरा देने पर मंथन किया गया। फिलहाल यह सिस्टम लगभग तैयार है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की अगुवाई में जिस डिफेंस सिस्टम को तैयार किया जा रहा है, उसमें दिल्ली के चारों ओर तीन सुरक्षा घेरे होंगे।

इन्हें आउटर, मिडिल और इनर रिंग नाम दिया गया है। ये दिल्ली की सरकारी इमारतों, हवाई अड्‌डों जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और उनके आसपास तैनात होंगे। आउटर रिंग में सिग्नल सिस्टम तो मिडिल में मिसाइलें तैनात होंगी। ये दुश्मन की हर रेंज की मिसाइलों, ड्रोन्स, लड़ाकू विमानों या लायटरिंग एम्युनिशन को नाकाम कर देगा।

नई सुरक्षा व्यवस्था के तहत राजधानी में उन्नत सर्विलांस टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरे, फेस रिकग्निशन सिस्टम और रियल-टाइम डेटा एनालिसिस को शामिल किया जा रहा है। प्रमुख सरकारी भवनों, भीड़भाड़ वाले इलाकों, महत्वपूर्ण सड़कों और सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। कैपिटल डोम को एक एकीकृत सुरक्षा ढांचे के रूप में विकसित किया गया है, जहां से विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर सकेंगी।

सॉफ्ट किल सिस्टम भी लगे होंगे

कमांड सेंटर में सॉफ्ट किल सिस्टम भी होंगे, जिसमें जैमिंग प्रणाली और लेजर किरणों से हमलावर सिस्टम को निष्फल किया जा सकेगा। पूरा सिस्टम मोबाइल होगा और इसे समय के साथ अपग्रेड किया जा सकेगा। इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम को रूसी मिसाइल रोधी प्रणाली एस–400 से भी जोड़ा जाएगा। यह सिस्टम पूरी तरह स्वदेश में विकसित किया जा रहा है। बाद में इसी के इर्दगिर्द सुदर्शन चक्र का जाल बुना जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, इस सिस्टम से कानून-व्यवस्था की स्थिति पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की पहचान पहले ही चरण में हो सकेगी। राजधानी में होने वाले बड़े आयोजनों, वीवीआईपी मूवमेंट और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान यह व्यवस्था खास तौर पर प्रभावी साबित होगी। इसके साथ ही ट्रैफिक मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन में भी नई तकनीक से मदद मिलने की उम्मीद है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली जैसे महानगर के लिए आधुनिक और एकीकृत सुरक्षा प्रणाली समय की मांग है। बढ़ती आबादी, यातायात दबाव और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच यह कदम राजधानी को स्मार्ट और सुरक्षित शहर बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। कैपिटल डोम के जरिए विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने की प्रक्रिया भी तेज और अधिक प्रभावी होगी।

दिल्ली को हाईटेक सिक्योरिटी सिस्टम से लैस करने की यह योजना आने वाले समय में अन्य महानगरों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। इससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि आम नागरिकों में भी सुरक्षा को लेकर भरोसा बढ़ेगा।

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