अडाणी-ग्रीन-एनर्जी केस में प्रणव अडाणी को क्लीन चिट मिली

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नई दिल्ली, 13 दिसंबर 2025 । अडाणी ग्रीन एनर्जी से जुड़े चर्चित मामले में प्रणव अडाणी को बड़ी कानूनी राहत मिली है। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित एजेंसियों ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। इस फैसले के साथ ही लंबे समय से चल रहे विवादों और अटकलों पर विराम लग गया है। आदेश में कहा गया है कि जांच के दौरान प्रणव अडाणी के खिलाफ किसी भी तरह के अनियमितता या नियम उल्लंघन के ठोस सबूत नहीं मिले।

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने अडाणी ग्रीन एनर्जी की 2021 में SB एनर्जी अधिग्रहण डील से जुड़े इनसाइडर ट्रेडिंग केस में प्रणव अडाणी और उनके दो रिश्तेदारों को क्लीन चिट दे दी है। 50 पेज के ऑर्डर में सेबी ने कहा कि उनके खिलाफ अनपब्लिश्ड प्राइस सेंसिटिव इनफार्मेशन (UPSI) शेयर करने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

ट्रेड्स पब्लिक इन्फॉर्मेशन के बाद हुए और नॉर्मल पैटर्न से मैच करते हैं। अलग ऑर्डर में भी सेबी ने विनोद बहेटी समेत अन्य को भी आरोपों से क्लियर किया है।

क्या था पूरा मामला

यह केस अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) की SB एनर्जी होल्डिंग्स को 3.5 बिलियन डॉलर यानी 31,693 करोड़ रुपए में खरीदने की डील से जुड़ा था। डील की ऑफिशियल अनाउंसमेंट 19 मई 2021 को हुई थी। सेबी ने जनवरी 2021 से अगस्त 2021 तक के ट्रेड्स की जांच की।

नवंबर 2023 में गौतम अडाणी के भतीजे प्रणव अडाणी, कुणाल शाह और नृपाल शाह को शो-कॉज नोटिस जारी हुआ था। कुणाल शाह की प्रणव की कजिन नृपाल से शादी हुई है। उन पर आरोप था कि प्रणव ने गुप्त जानकारी शेयर की और रिश्तेदारों ने उस आधार पर 17-18 मई को शेयर खरीदे। जिससे उन्हें ₹51 लाख और ₹40 लाख का प्रॉफिट हुआ था।

सेबी ने क्लीन चिट क्यों दी

सेबी के ऑर्डर में मुख्य पॉइंट यह था कि 16 मई 2021 को कुणाल का प्रणव से फोन कॉल UPSI शेयर करने के लिए नहीं था। उस दिन दोपहर में ही मीडिया में SB एनर्जी डील की रिपोर्ट्स आ चुकी थीं, इसलिए जानकारी पब्लिक हो गई थी।

ट्रेड्स उसके बाद हुए और इनका पैटर्न नॉर्मल ट्रेडिंग से मैच करता है। शेयर प्राइस का उछाल भी मीडिया रिपोर्ट्स के बाद शुरू हुआ। सेबी ने कहा कि आरोप साबित नहीं होते, इसलिए कोई डायरेक्शन या पेनाल्टी नहीं लगाई जाएगी। मामला बंद कर दिया गया है।

जांच एजेंसियों ने अपने निष्कर्ष में स्पष्ट किया कि कंपनी के संचालन, प्रबंधन और कारोबारी निर्णय तय नियमों और कानूनी ढांचे के भीतर पाए गए। वित्तीय लेन-देन, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और नियामकीय अनुपालन की विस्तृत जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि लगाए गए आरोप तथ्यात्मक आधार पर टिक नहीं पाए। इसके चलते प्रणव अडाणी को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया।

इस फैसले को अडाणी समूह के लिए एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि इससे निवेशकों और बाजार में भरोसा मजबूत होने की उम्मीद है। पिछले कुछ समय से अडाणी ग्रीन एनर्जी और उससे जुड़े मामलों पर देश-विदेश में नजर बनी हुई थी। क्लीन चिट मिलने के बाद कंपनी के कामकाज और भविष्य की योजनाओं को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में पारदर्शी जांच और स्पष्ट निष्कर्ष कॉर्पोरेट जगत के लिए जरूरी होते हैं। इससे न सिर्फ कंपनियों की साख तय होती है, बल्कि यह भी स्पष्ट होता है कि कानून के दायरे में रहकर किए गए कारोबारी फैसलों को संरक्षण मिलता है। प्रणव अडाणी को मिली क्लीन चिट को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

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