पाकिस्तान को 12 राज्यों में बांटने की तैयारी

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इस्लामाबाद, 10 दिसंबर 2025 । पाकिस्तान के भीतर लंबे समय से जारी राजनीतिक अस्थिरता, जातीय तनाव, आर्थिक गिरावट और आंतरिक संघर्षों के बीच अब यह चर्चा तेज़ हो गई है कि देश के प्रशासनिक ढांचे में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन की तैयारी की जा रही है। सूत्रों और विश्लेषकों के अनुसार, एक प्रस्ताव सामने आया है जिसमें पाकिस्तान को 12 नए राज्यों में बाँटने की संभावना जताई जा रही है। यह कदम यदि वास्तविकता में बदलता है, तो यह पाकिस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा प्रशासनिक परिवर्तन होगा, जिसके राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षा संबंधी प्रभाव दक्षिण एशिया पर गहरा असर डालेंगे।

पाकिस्तान के चारों प्रांतों को 12 हिस्सों में बांटने की तैयारी चल रही है। देश के संचार मंत्री अब्दुल अलीम खान ने कहा है कि देश में छोटे-छोटे प्रांत बनना अब तय है। उनका कहना है कि इससे शासन बेहतर होगा।

अब्दुल अलीम खान रविवार को शेखूपुरा में इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी (IPP) के कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि सिंध और पंजाब में तीन-तीन नए प्रांत बनाए जा सकते हैं। ऐसा ही विभाजन बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में भी हो सकता है।

अलीम खान ने कहा कि हमारे आसपास के देशों में कई छोटे प्रांत हैं। इसलिए पाकिस्तान में भी ऐसा होना चाहिए। अलीम खान की पार्टी IPP पीएम शहबाज शरीफ की गठबंधन सरकार का हिस्सा है। हालांकि बिलावल भुट्टो की पार्टी PPP ने इसका विरोध किया है।

सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने धमकी देते हुए कहा कि अल्लाह के सिवा कोई भी सिंध को बांटने की ताकत नहीं रखता।

कौन-कौन से नए प्रांत बन सकते हैं?

पाकिस्तान सरकार की तरफ से अभी आधिकारिक नक्शा जारी नहीं किया गया है, लेकिन जिन इलाकों की चर्चा है, वे कुछ इस तरह हैं-

  • पंजाब: उत्तर पंजाब, मध्य पंजाब, दक्षिण पंजाब
  • सिंध: कराची सिंध, मध्य सिंध, ऊपरला सिंध
  • KP: उत्तरी KP, दक्षिणी KP, आदिवासी KP/फाटा रीजन
  • बलूचिस्तान: पूर्व बलूचिस्तान, पश्चिम बलूचिस्तान, दक्षिणी बलूचिस्तान

बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव में पंजाब को कई हिस्सों में विभाजित करने, सिंध और बलूचिस्तान को छोटे राज्यों में बाँटने, और खैबर पख्तूनख्वा के भीतर अलग क्षेत्र बनाने के सुझाव शामिल हैं। समर्थकों का मानना है कि छोटे राज्यों के गठन से स्थानीय लोग अधिक प्रतिनिधित्व पाएंगे, विकास योजनाएँ ज़मीनी स्तर तक पहुँचेंगी, और प्रशासनिक व्यवधान कम होंगे। इसके विपरीत, विरोधियों का कहना है कि यह कदम जातीय और भाषाई आधार पर विभाजन को बढ़ावा देगा, जो देश को और अधिक अस्थिर कर सकता है।

इस संभावित पुनर्गठन का प्रभाव केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा। भारत सहित पड़ोसी देशों की सुरक्षा, सीमा-प्रबंधन और राजनयिक रणनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है। छोटे राज्यों के गठन से प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर होने की संभावना है, जिससे सीमा-पार आतंकवाद, शरणार्थी संकट और आर्थिक अस्थिरता जैसी चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। दूसरी ओर, यदि परियोजना सफल रहती है, तो यह क्षेत्र में स्थिरता और बेहतर शासन का एक नया मॉडल भी बन सकती है।

यह विषय अभी पूरी तरह प्रस्ताव और चर्चाओं के स्तर पर है, लेकिन जिस तरह देश के विभिन्न हिस्सों में असंतोष बढ़ता जा रहा है, उससे ये संकेत स्पष्ट हैं कि पाकिस्तान अपने प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलावों की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।
यह परिवर्तन पाकिस्तान की राजनीतिक संरचना, शक्ति संतुलन और उसके पड़ोसियों के साथ संबंधों को नए स्वरूप में ढाल सकता है।

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