संसद परिसर में कुत्ता लेकर पहुंचीं कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी,पहले दिन से ही राजनीतिक हलचल तेज

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नई दिल्ली, 01 दिसंबर 2025 । संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत जिस गंभीरता और अनुशासन के साथ होनी चाहिए थी, उससे ठीक उलट माहौल देखने को मिला जब कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रेणुका चौधरी अपने पालतू कुत्ते के साथ संसद परिसर पहुँच गईं। उनका यह कदम देखते ही देखते राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल तेज हो गई।

जैसे ही उनकी गाड़ी संसद के गेट पर रुकी, साथ में दिखा उनका छोटा पालतू कुत्ता। सुरक्षा कर्मियों और मीडिया कैमरों के बीच यह दृश्य हर किसी के लिए आश्चर्य का विषय बन गया। कई लोगों ने इसे संसद की परंपराओं और मर्यादाओं के खिलाफ कदम बताया। सांसद के ऐसे व्यवहार ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थान में इस तरह की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की अनुमति होनी चाहिए।

यह घटना केवल एक ‘वायरल वीडियो’ भर नहीं थी। इसके राजनीतिक अर्थ भी सामने आए। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों में इस मुद्दे पर तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई। भाजपा नेताओं ने इसे संसदीय गरिमा का खुला उल्लंघन बताया और कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनका तर्क था कि संसद परिसर एक सुरक्षित, संवेदनशील और मर्यादा आधारित क्षेत्र है, जहां बिना अनुमति किसी जानवर को लेकर प्रवेश करना नियमों के खिलाफ है।

वहीं, रेणुका चौधरी ने इस आलोचना को हल्के अंदाज़ में लेते हुए कहा कि उनका कुत्ता छोटा और हानिरहित है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए यह भी कहा कि “काटने वाले तो संसद के अंदर बैठे हैं।” उनके इस तंज ने विवाद को और बढ़ा दिया तथा राजनीतिक बहस को तीखा बना दिया।

घटना के बाद राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि यह सिर्फ एक व्यवहारिक गलती या निजी पसंद का मामला नहीं है, बल्कि यह संसद की गरिमा और उसके अनुशासन को लेकर उठे सवालों से जुड़ा विषय है। संसद देश का सर्वोच्च नीति निर्माण मंच है, और वहां प्रवेश के लिए बने सुरक्षा व अनुशासन नियमों का पालन सभी सांसदों पर समान रूप से लागू होता है।

इस विवाद ने एक अहम मुद्दा सामने रखा — क्या संसद जैसी संवेदनशील जगह पर व्यक्तिगत प्रतीकवाद या नाटकीयता के लिए कोई जगह होनी चाहिए? क्या लोकतांत्रिक संस्थानों की मर्यादा को व्यक्तिगत छवि के आगे रखा जाना चाहिए?

फिलहाल, मामला राजनीतिक चर्चा और मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है। आगे यह देखना होगा कि संसद प्रशासन इस कदम को नियमों के उल्लंघन के रूप में देखता है या सिर्फ एक असामान्य घटना मानकर छोड़ देता है। पर इतना तय है कि यह घटना सत्र के पहले दिन से ही राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर चुकी है।

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