सेंसेक्स से बाहर होने की कगार पर टाटा मोटर्स

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नई दिल्ली, 18 नवम्बर 2025 । टाटा समूह की प्रमुख ऑटो कंपनी टाटा मोटर्स अब सेंसेक्स से बाहर होने की कगार पर पहुंच गई है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की 30 कंपनियों वाली इस प्रमुख सूचकांक में शामिल किसी भी कंपनी का वजन, मार्केट कैप और लिक्विडिटी अहम भूमिका निभाते हैं। हाल के महीनों में टाटा मोटर्स के शेयर में आई गिरावट, कंपनी की फ्री-फ्लोट मार्केट कैप में कमी और सेक्टरल रोटेशन के चलते एक्सचेंज इसे इंडेक्स से बाहर करने की समीक्षा कर रहा है।

चूंकि सेंसेक्स भारतीय शेयर बाजार का सबसे पुराना और विश्वसनीय संकेतक माना जाता है, इसलिए इसमें शामिल कंपनियों का चयन एक सख्त प्रक्रिया से होकर गुजरता है। टाटा मोटर्स बीते दो सालों में EV सेगमेंट में आक्रामक निवेश, घरेलू बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते उतार-चढ़ाव से गुजर रही है। कंपनी के स्टॉक ने 2024 और 2025 के शुरुआती महीनों में मजबूत प्रदर्शन किया था, लेकिन बाद में मार्जिन प्रेशर, चीन-यूरोप में कमजोर डिमांड और लागत बढ़ने से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।

टाटा समूह की प्रमुख ऑटो कंपनी टाटा मोटर्स अब सेंसेक्स से बाहर होने की कगार पर पहुंच गई है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की 30 कंपनियों वाली इस प्रमुख सूचकांक में शामिल किसी भी कंपनी का वजन, मार्केट कैप और लिक्विडिटी अहम भूमिका निभाते हैं। हाल के महीनों में टाटा मोटर्स के शेयर में आई गिरावट, कंपनी की फ्री-फ्लोट मार्केट कैप में कमी और सेक्टरल रोटेशन के चलते एक्सचेंज इसे इंडेक्स से बाहर करने की समीक्षा कर रहा है।

चूंकि सेंसेक्स भारतीय शेयर बाजार का सबसे पुराना और विश्वसनीय संकेतक माना जाता है, इसलिए इसमें शामिल कंपनियों का चयन एक सख्त प्रक्रिया से होकर गुजरता है। टाटा मोटर्स बीते दो सालों में EV सेगमेंट में आक्रामक निवेश, घरेलू बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते उतार-चढ़ाव से गुजर रही है। कंपनी के स्टॉक ने 2024 और 2025 के शुरुआती महीनों में मजबूत प्रदर्शन किया था, लेकिन बाद में मार्जिन प्रेशर, चीन-यूरोप में कमजोर डिमांड और लागत बढ़ने से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।

टाटा समूह की प्रमुख ऑटो कंपनी टाटा मोटर्स अब सेंसेक्स से बाहर होने की कगार पर पहुंच गई है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की 30 कंपनियों वाली इस प्रमुख सूचकांक में शामिल किसी भी कंपनी का वजन, मार्केट कैप और लिक्विडिटी अहम भूमिका निभाते हैं। हाल के महीनों में टाटा मोटर्स के शेयर में आई गिरावट, कंपनी की फ्री-फ्लोट मार्केट कैप में कमी और सेक्टरल रोटेशन के चलते एक्सचेंज इसे इंडेक्स से बाहर करने की समीक्षा कर रहा है।

चूंकि सेंसेक्स भारतीय शेयर बाजार का सबसे पुराना और विश्वसनीय संकेतक माना जाता है, इसलिए इसमें शामिल कंपनियों का चयन एक सख्त प्रक्रिया से होकर गुजरता है। टाटा मोटर्स बीते दो सालों में EV सेगमेंट में आक्रामक निवेश, घरेलू बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते उतार-चढ़ाव से गुजर रही है। कंपनी के स्टॉक ने 2024 और 2025 के शुरुआती महीनों में मजबूत प्रदर्शन किया था, लेकिन बाद में मार्जिन प्रेशर, चीन-यूरोप में कमजोर डिमांड और लागत बढ़ने से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।

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