बिरसा मुंडा की विरासत आज भी भारत की सामूहिक चेतना का मार्गदर्शन करती है – विजेन्द्र गुप्ता

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  • ऐसे कार्यक्रम मोदी की ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को जीवंत करते हैं – आशीष सूद

नई दिल्ली, 17 नवंबर 2025 । “हम भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाते हुए इस संकल्प को दोहराएँ कि भारत विविधता का सम्मान करे, पर्यावरण की रक्षा करे और सबसे वंचित व्यक्ति को भी राष्ट्र की मुख्यधारा में उसका सम्मानित स्थान मिले” यह बात दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली विधान सभा परिसर में आयोजित भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में कही। गुप्ता ने बिरसा मुंडा को साहस का प्रतीक बताया, जिनकी विरासत आज भी भारत की सामूहिक चेतना का मार्गदर्शन करती है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री आशीष सूद, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट तथा विधायक संजय गोयल उपस्थित थे।

मेरा युवा भारत, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित 8 जिलों –बस्तर, कांकेर, नारायणपुर, पश्चिमी सिंहभूम, बालाघाट, कंधमाल, कालाहांडी और गढ़चिरौली से आए 200 युवाओं और सीआरपीएफ, बीएसएफ तथा आईटीबीपी के 20 अधिकारियों ने दिल्ली विधान सभा का भ्रमण किया और अपने दिल्ली दौरे के अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय राजधानी की आधुनिक संरचना, समृद्ध संस्कृति व राजनीतिक वातावरण को नज़दीक से देखने का अवसर मिलने पर अत्यंत उत्साह व्यक्त किया। कई युवाओं ने मंच पर आकर अपने अनुभव व्यक्त किए, जिसने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को समझने का अनूठा अवसर प्रदान किया।

अध्यक्ष गुप्ता ने कहा कि बिरसा मुंडा का जनआंदोलन केवल एक विद्रोह नहीं था, बल्कि आध्यात्मिक जागरण, सामाजिक सुधार और राजनीतिक चेतना का अनुशासित जन-आंदोलन था। उन्होंने कहा कि 1908 का छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम बिरसा मुंडा के संघर्ष का अमर प्रमाण है, जिसने आदिवासी भूमि की रक्षा सुनिश्चित की और बेगारी जैसी प्रथाओं को समाप्त किया। उन्होंने कहा, “जल, जंगल, जमीन की उनकी भावना हमें याद दिलाती है कि सच्ची प्रगति लोगों और प्रकृति , दोनों का सम्मान करने में है।”

विधानसभा अध्यक्ष ने नक्सल प्रभावित जिलों से आए युवाओं व अर्द्धसैनिक अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी उपस्थिति राष्ट्रीय एकता और सेवा की भावना का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से ‘धरती आबा’ बिरसा मुंडा के आदर्शों जैसे समानता, ईमानदारी और पर्यावरण संरक्षण से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “बिरसा मुंडा का जीवन सिखाता है कि नेतृत्व का आधार अंत:करण है और राष्ट्र की शक्ति न्याय, विविधता और करुणा में निहित है।”

कैबिनेट मंत्री आशीष सूद ने कहा कि “शिक्षा तभी पूर्ण होती है जब वह युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ती है।” उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को सहेजते हैं। ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों से आए युवाओं और अर्द्धसैनिक बलों के अधिकारियों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा उनके लिए अपने आप में एक प्रेरणादायक अनुभव है। उन्होंने कहा कि न्यू एजुकेशन पॉलिसी का उद्देश्य तभी सार्थक होता है जब विद्यार्थी देश के विभिन्न हिस्सों की यात्रा करें, सांस्कृतिक विविधता को समझें और अपनी परंपराओं को जानें।
आशीष सूद ने अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने इन बच्चों को देश की राजधानी के ऐतिहासिक विधानसभा परिसर को देखने और समझने का अवसर प्रदान किया। उन्होंने कहा कि यह अनुभव युवाओं के मन में स्थायी छाप छोड़ेगा और राष्ट्रीय एकता को और सशक्त करेगा।

विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि मेरा युवा भारत पहल के अंतर्गत युवाओं और अर्द्धसैनिक अधिकारियों का यह दौरा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को सशक्त बनाने के राष्ट्रीय संकल्प का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा का यह भ्रमण उनके भीतर नए सपने व नई ऊर्जा जगाएगा तथा उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुति भी आयोजित की गई, जिसमें हिंदी अकादमी के कलाकारों ने झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्य प्रदेश की पारंपरिक नृत्य शैलियों का मनमोहक प्रदर्शन किया। इन रंगारंग प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उत्साह और सांस्कृतिक समृद्धि का वातावरण भर दिया, जिसे प्रतिभागियों ने अत्यंत सराहा।

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