भारत का घरेलू टेस्ट प्रभुत्व कमजोर—6 में से 4 मुकाबले हारे

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नई दिल्ली, पिछले कुछ वर्षों में भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम का घरेलू रिकॉर्ड हमेशा से दुनिया के सबसे मजबूत आंकड़ों में गिना जाता रहा है। लेकिन हालिया प्रदर्शन ने इस प्रभुत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत ने अपनी घरेलू सरज़मीं पर खेले गए पिछले 6 टेस्ट मैचों में से 4 मुकाबले गंवा दिए, जो टीम इंडिया के लिए चिंताजनक संकेत है।

साउथ अफ्रीका से मिली हार के बाद किसी ने कोलकाता की कठिन पिच को जिम्मेदार ठहराया, तो किसी ने भारत की खराब बल्लेबाजी को। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि क्या भारतीय बैटर्स स्पिनर्स के खिलाफ बल्लेबाजी की स्किल खोते जा रहे हैं।

कोच गंभीर बोले: पिच नहीं, बैटिंग खराब भारतीय कोच गौतम गंभीर ने कहा- ‘पिच इतनी भी खराब नहीं थी कि बल्लेबाजी न की जा सके। यह एकदम वैसी पिच थी, जैसी हम चाहते थे। भारतीय बैटर्स ने स्पिनर्स के खिलाफ खराब बल्लेबाजी की। हमारे बैटर्स को मेंटली और स्किल के लिहाज से बेहतर होने की जरूरत है।’ गंभीर की बात वाजिब भी है। क्योंकि, भारत ने कोलकाता टेस्ट में 60% विकेट स्पिनर्स के खिलाफ गंवाए हैं। टीम के 20 में से 12 बैटर्स स्पिनर्स की बॉल पर आउट हुए।

क्या हारने की वजह स्पिनर्स को ना खेल पाना है? हां, पिछले एक साल के आंकड़े यही कह रहे हैं। पिछले साल में भारत में खेले गए 6 टेस्ट मैचों में इंडियन टीम के 87 विकेट गिरे हैं, इनमें से 60 विकेट स्पिनर्स को मिले हैं। जबकि 27 विकेट तेज गेंदबाजों के हिस्से आए हैं।

टेस्ट क्रिकेट में भारत की प्रतिष्ठा विश्व cricket में एक मजबूत स्तंभ रही है। ऐसे में घरेलू हारों की यह सीरीज़ बताती है कि टीम को अपनी रणनीति, संयोजन, और मानसिकता को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता है।
विशेष रूप से स्पिन जोड़ी, मध्यक्रम और कप्तानी की रणनीति पर फोकस करना होगा ताकि टीम वापस अपने पुराने लय में लौट सके।

भारतीय टीम अब आगामी टेस्ट सीरीज़ में इन गलतियों को सुधारकर घरेलू क्रिकेट में अपनी बादशाहत फिर से स्थापित करने की कोशिश करेगी।

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