कांग्रेस का आरोप-RSS के लिए पाकिस्तानी कंपनी काम कर रही

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नई दिल्ली, 14 नवम्बर 2025 । कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर एक तीखा आरोप लगाया है: पार्टी का दावा है कि RSS ने अमेरिका में अपनी राजनीतिक छवि और हितों को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान से जुड़ी लॉबिंग फर्म की मदद ली है। इस दावे ने भारतीय राजनीति में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है, जहाँ राष्ट्रीय हित, विदेशी लॉबिंग और संगठन की नैतिकता पर बहस तेज हो गई है।

कांग्रेस ने गुरुवार को आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के लिए पाकिस्तान की एक आधिकारिक लॉबिंग कंपनी काम कर रही है। इसे अमेरिका में संघ के हितों की पैरवी करने के लिए हायर किया गया है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पर लिखा- कुछ दिन पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने माना था कि RSS रजिस्टर्ड ऑर्गनाइजेशन नहीं है और वह कोई टैक्स नहीं देता। अब हमें पता चला है कि RSS ने भारी रकम खर्च करके अमेरिकी लॉ फर्म स्क्वायर पैटर्न बॉक्स (SPB) को हायर किया है।

RSS ने कांग्रेस के आरोप को खारिज किया। राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा- ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत में काम करता है और अमेरिका में कोई लॉबिंग फर्म नहीं हायर की है।’ लॉबिंग फर्म सरकार के सामने किसी संगठन के हितों की पैरवी करती है।

राजनीतिक और नैतिक निहितार्थ

  • विदेशी लॉबिंग और पारदर्शिता
    यह मामला लॉबिंग की पारदर्शिता, विदेशी फंडिंग और सार्वजनिक संस्थाओं की नैतिक जिम्मेदारियों पर सवाल उठाता है। अगर RSS जैसे संगठन विदेशी लॉबिंग एजेंटों का उपयोग कर रहे हैं, तो यह राजनीतिक निगरानी, कानूनी अनुपालन और सार्वजनिक भरोसे के मानकों पर पहुंच सकता है।

  • राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा
    कांग्रेस का तर्क है कि RSS और उसके समर्थक देश के हितों के खिलाफ काम कर सकते हैं, खासकर अगर उन पर पाकिस्तान-जैसी संवेदनशील संबंधों वाली लॉबिंग फर्म से जुड़ने का आरोप लगाया जाए।

  • राजनीतिक युद्ध
    यह आरोप राष्ट्रीय स्तर पर एक गंभीर राजनीतिक युद्ध का हिस्सा बन गया है। चुनावी माहौल, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और कश्मीर, पाकिस्तान-संबंधी तनावों में ऐसे दावे संवेदनशील हो सकते हैं और बड़े वोट-ध्रुवीकरण को जन्म दे सकते हैं।

  • जवाबदेही और स्वतंत्र जांच
    इन आरोपों की विश्वसनीयता और वास्तविकता निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग पहले से तेज हो सकती है। चाहे कानूनी जांच हो या राजनीतिक आयोग, ये कदम भारतीय लोकतंत्र के लिए भी महत्वपूर्ण होंगे।

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