तुर्किये ने इजराइली PM के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया

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तुर्किये , 08 नवम्बर 2025 । तुर्किये ने इजराइल के प्रधानमंत्री के खिलाफ औपचारिक गिरफ्तारी वारंट जारी कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी हलचल खड़ी कर दी है। यह वारंट गाज़ा में चल रहे सैन्य अभियान, नागरिकों की मौत और कथित मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े आरोपों को लेकर जारी किया गया है। तुर्किये की अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए PM और सेना के कई शीर्ष अधिकारियों को आरोपी माना।

क्यों जारी हुआ वारंट?
  • तुर्किये ने इजराइली नेतृत्व पर युद्ध अपराध और नरसंहार जैसे गंभीर आरोप लगाए

  • गाज़ा में हजारों नागरिकों की मौत, बस्तियों का विध्वंस और मानवीय सहायता रोकने जैसे मुद्दों को आधार बनाया गया

  • अदालत ने माना कि सबूत और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टें आरोपों के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करती हैं

तुर्किये के राष्ट्रपति और विदेश मंत्रालय पहले ही इजराइली कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जता चुके हैं और संयुक्त राष्ट्र स्तर पर भी दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

तुर्किये ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी सरकार के कई बड़े अधिकारियों पर गाजा में नरसंहार का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। तुर्किये में आने पर इन लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है।

तुर्किये अभियोक्ता कार्यालय के बयान के अनुसार, 37 संदिग्धों में इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर और सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर शामिल हैं।

फिलहाल पूरी सूची जारी नहीं की गई है। तुर्किये का आरोप है कि इजराइल ने गाजा में ‘नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध’ व्यवस्थित तरीके से किए हैं। बयान में तुर्किये ने गाजा में बनाए गए ‘तुर्की-फिलिस्तीनी मैत्री अस्पताल’ का भी जिक्र है, जिसे इजराइल ने मार्च में बमबारी कर तबाह कर दिया था।

दूसरी ओर इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने इसे ‘तुर्की के तानाशाह एर्दोआन का प्रचार स्टंट’ बताते हुए खारिज कर दिया। पिछले साल तुर्किये दक्षिण अफ्रीका के साथ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में इजराइल पर नरसंहार के मुकदमे में शामिल हुआ था।

  • तुर्किये अंतरराष्ट्रीय अदालत (ICC) और संयुक्त राष्ट्र में भी इस मुद्दे को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है

  • इजराइल पर कूटनीतिक दबाव बढ़ सकता है

  • यह मुद्दा वैश्विक राजनीति, युद्ध-नैतिकता और मानवाधिकार बहस का केंद्र बन सकता है

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