- किसी राष्ट्र की शक्ति उसकी ताकत में नहीं, बल्कि उसके हृदयों और उद्देश्यों की एकता में निहित होती है” – विजेंद्र गुप्ता
- सरदार पटेल की विरासत भारत की शक्ति और एकता की प्रतीक है – कपिल मिश्रा
- यह पूरे विश्व के लिए गर्व का विषय है कि सरदार पटेल ने 565 में से 562 रियासतों को एकजुट करते समय एक बूंद भी खून नहीं बहने दिया” – निरंजनाबेन कालारथी
नई दिल्ली, 30 अक्तूबर 2025 । “एकता ईंट-पत्थरों से नहीं बनती, एकता भावना से उत्पन्न होती है और भावना विचार से जन्म लेती है” यह बात बिहार के राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर दिल्ली विधानसभा में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर दिल्ली विधानसभा के माननीय अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, दिल्ली कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा तथा स्वराज आश्रम, बारडोली (गुजरात) की प्रशासक सुश्री निरंजनाबेन कालारथी की उपस्थिति में श्री वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर विधानसभा परिसर में “सरदार पटेल और भारत के एकीकरण की यात्रा” शीर्षक पर एक विशेष प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया, जिसमें लौह पुरुष के जीवन, दृष्टि और विरासत को दर्शाने वाले दुर्लभ अभिलेखीय चित्र एवं ऐतिहासिक तस्वीरें शामिल थी। गांधी स्मृति के उपाध्यक्ष विजय गोयल, वरिष्ठ नेता सुधांशु मित्तल तथा अन्य विधायकगण भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
बिहार के राज्यपाल खान ने कहा कि सच्ची एकता किसी राष्ट्र की सामूहिक चेतना से उत्पन्न होती है। ‘सरदार पटेल और भारत के एकीकरण की यात्रा’ विषय पर बोलने का अवसर मिलने पर उन्होंने कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि वे भारत माता के इस महान सपूत की पवित्र भूमि को नमन करने का अवसर पाकर स्वयं को धन्य मानते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “भारत को विकसित और अग्रणी राष्ट्र” बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए हमें सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा जीवनभर साधे गए आदर्शों और मूल्यों को निरंतर स्मरण और जागृत रखना होगा।
आदि शंकराचार्य और सरदार पटेल की तुलना करते हुए खान ने कहा कि जैसे शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत के माध्यम से भारत की आध्यात्मिक एकता स्थापित की, वैसे ही सरदार पटेल ने साहस और दृढ़ विश्वास से भारत की राजनीतिक एकता को मूर्त रूप दिया। उन्होंने शंकराचार्य और चांडाल के संवाद का उदाहरण देते हुए कहा कि “सच्ची एकता इस अनुभूति से जन्म लेती है कि प्रत्येक जीव में वही दिव्य चेतना विद्यमान है।” खान ने कहा कि कई रियासतों का एकीकरण सरदार पटेल का ऐतिहासिक राष्ट्र-निर्माण कार्य था, “जो बिस्मार्क के जर्मनी एकीकरण से भी महान था।”
उन्होंने सरदार पटेल के उन शब्दों को उद्धृत किया जो भारतीय संघ के उद्घाटन अवसर पर कहे गए थे । “सदियों बाद, पहली बार भारत वास्तव में एक एकीकृत राष्ट्र कहलाने योग्य हुआ है।” खान ने कहा कि पटेल की यह दृष्टि आज भी भारत की शक्ति और अखंडता की आधारशिला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने के निर्णय को “भारत की एकता के शिल्पी के प्रति उपयुक्त श्रद्धांजलि” बताया, जो “पूरे राष्ट्र की कृतज्ञता और सम्मान की अभिव्यक्ति” है।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि “किसी राष्ट्र की शक्ति उसकी सैन्य ताकत में नहीं, बल्कि उसके हृदयों और उद्देश्यों की एकता में निहित होती है।” उन्होंने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में भारत के एकीकरण के इस महान शिल्पी को नमन करते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शिता और साहस ने विभाजित भारत को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में रूपांतरित किया।
बारडोली के खेतों से लेकर संविधान सभा के प्रांगण तक, श्री गुप्ता ने कहा, सरदार पटेल ने आशा को समरसता में और स्वतंत्रता को राष्ट्रत्व में परिवर्तित किया। उनकी कूटनीति, दृढ़ निश्चय और भारतीय आत्मा में अटूट विश्वास ने कई रियासतों को एक भारत में पिरोया तथा भावी पीढ़ियों के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) जैसी सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था की नींव रखी।
गुप्ता ने कहा कि सरदार पटेल का जीवन हमें सिखाता है कि एकता कोई नारा नहीं, बल्कि एक पवित्र दायित्व है। अनुशासन, ईमानदारी और निःस्वार्थ सेवा के उनके आदर्श आज भी भारत की प्रगति के मार्गदर्शक हैं। राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे उस एकता को संजोए रखने का संकल्प लें जिसकी नींव सरदार पटेल ने रखी थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज राष्ट्र एक बार फिर पटेल के अमर संदेश को दोहरा रहा है, “भारत की वास्तविक शक्ति उसके लोगों की एकता और उसकी संस्थाओं की अखंडता में निहित है।”

दिल्ली कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर आयोजित संगोष्ठी में उनके प्रति अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सरदार पटेल की विरासत भारत की शक्ति, सत्यनिष्ठा और अखंडता की प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि “शायद, अन्य कई महान विभूतियों की तरह सरदार पटेल को भी लंबे समय तक उपेक्षित रखा गया था, लेकिन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने यह सुनिश्चित किया कि यह ऐतिहासिक अन्याय समाप्त हो।” उन्होंने कहा कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के माध्यम से सरदार पटेल के आदर्शों को न केवल भारत में, बल्कि विश्वभर में अमरता मिली है। उन्होंने कहा, “जब तक भारत माता का एक भी सच्चा सपूत सरदार पटेल जैसा है, तब तक कोई शक्ति इस राष्ट्र को विभाजित नहीं कर सकती।”
स्वराज आश्रम, बारडोली की प्रशासक निरंजनाबेन कालारथी ने कहा, “यह पूरे विश्व के लिए गर्व का विषय है कि सरदार पटेल ने 565 में से 562 रियासतों को एकजुट करते समय एक बूंद भी रक्तपात नहीं होने दिया।” उन्होंने कहा कि “संवाद, स्नेह, कूटनीति, दूरदर्शिता और व्यावहारिक दृष्टि” के माध्यम से सरदार पटेल ने कन्याकुमारी से कश्मीर तक, सोमनाथ से अरुणाचल तक एक सशक्त और एकीकृत भारत का निर्माण किया। भवनगर रियासत के एकीकरण की एक भावनात्मक घटना सुनाते हुए उन्होंने बताया कि कैसे वहां की महारानी ने अपना स्त्रीधन राष्ट्र को अर्पित कर दिया , यह उस विश्वास और स्नेह का प्रतीक था जो रियासतों के शासकों के हृदय में सरदार पटेल के लिए था। उन्होंने कहा, “रियासतों के विलय के बाद भी सरदार साहब ने उन्हें सदैव पुत्रवत स्नेह दिया।”
कालारथी ने सरदार पटेल को भारत की प्रशासनिक व्यवस्था के शिल्पी और करुणा से परिपूर्ण नेता के रूप में श्रद्धांजलि दी। बारडोली के स्वराज आश्रम से अपने बचपन के जुड़ाव को याद करते हुए उन्होंने कहा, “वे भारत की एकता के स्तंभ थे, पर बच्चों से इतनी कोमलता से बात करने वाले एक स्नेहमयी व्यक्तित्व भी थे।” उन्होंने कहा, “वे केवल भारत के लौह पुरुष ही नहीं, बल्कि करुणा और विनम्रता के प्रतीक भी थे।” उन्होंने सभी से उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया ताकि “भारत की एकता और अखंडता सदैव बनी रहे।”
विधानसभा परिसर में आयोजित विशेष प्रदर्शनी “सरदार पटेल और भारत के एकीकरण की यात्रा” में महात्मा गांधी और सरदार पटेल के रामगढ़ कांग्रेस अधिवेशन के दौरान संवाद के दुर्लभ चित्र, लॉर्ड लेटन (रॉयटर्स गुडविल मिशन) से हुई उनकी भेंटों के दृश्य, तथा पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ उनके ऐतिहासिक क्षणों की झलकियाँ शामिल हैं। इस प्रदर्शनी में सरदार पटेल से संबंधित स्मारक सिक्के, डाक टिकट, पुस्तकें और दस्तावेजों के चित्र भी प्रदर्शित किए गए हैं जो उनके राष्ट्रनिर्माण के अद्वितीय योगदान को रेखांकित करते हैं।
संगोष्ठी का समापन सरदार वल्लभभाई पटेल के आदर्शों एकता, अखंडता और राष्ट्रीय सेवा के प्रति सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। पुष्पांजलि और प्रेरक वक्तव्यों से सजी इस ऐतिहासिक सभा में दिल्ली विधानसभा ने पुनः यह संकल्प दोहराया कि लौह पुरुष के आदर्श सदैव हमारा पथप्रदर्शन करते रहेंगे और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना राष्ट्र की यात्रा को निरंतर आगे बढ़ाती रहेगी।
