आवारा कुत्तों पर SC ने सरकारों से फिर मांगा जवाब

Date:

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर 25 । देश में आवारा कुत्तों द्वारा आम जनता, खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर हो रहे हमलों के मामलों में लगातार वृद्धि को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकारों से विस्तृत जवाब मांगा है। न्यायालय ने कहा है कि “जन सुरक्षा और पशु अधिकारों के बीच संतुलन बनाना सरकारों की संवैधानिक ज़िम्मेदारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस नीति सामने नहीं आई है।”

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “हर हफ्ते देश के किसी न किसी हिस्से से बच्चों पर आवारा कुत्तों के हमले की खबरें आ रही हैं। यह बेहद गंभीर स्थिति है। राज्य सरकारें केवल कागज़ी रिपोर्ट भेज रही हैं, जबकि ज़मीन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं दिख रही।”

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आवारा कुत्तों से जुड़े केस में सुनवाई करते हुए सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट देने की याचिका खारिज कर दी।

जस्टिस नाथ ने कहा, “जब हम मुख्य सचिवों से हलफनामा दाखिल करने के लिए कहते हैं, तो वे इस पर चुप्पी साधे रहते हैं। हमारे आदेश का कोई सम्मान नहीं है। तो ठीक है, उन्हें आने दीजिए। हम उनसे निपट लेंगे।”

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिवों को 3 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। इससे पहले 27 अक्टूबर को कोर्ट ने पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़ सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से जवाब मांगा था।

सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्तों के काटने से होने वाले रेबीज के बारे में एक मीडिया रिपोर्ट पर एक्शन लेते 28 जुलाई से मामले की सुनवाई कर रहा है।

22 अगस्त- कोर्ट ने बढ़ाकर पूरे देश में कर दिया था

22 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े केस का दायरा दिल्ली-एनसीआर से बढ़ाकर पूरे देश में कर दिया था और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसमें पार्टी बनाने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर अगली सुनवाई 15 नवंबर को तय की है और तब तक सभी राज्यों को अपने अद्यतन आंकड़े और योजनाएँ प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला अब केवल पशु नियंत्रण का नहीं, बल्कि मानव सुरक्षा, शहरी प्रशासन की जिम्मेदारी और संवैधानिक नीति-निर्माण का बड़ा सवाल बन गया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related