“ जनसुविधा और सुगमता शासन की प्राथमिकता होनी चाहिए” – विजेन्द्र गुप्ता

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  • अध्यक्ष के निर्देश पर दिल्ली जल बोर्ड ने शीघ्र कार्रवाई शुरू की, सात दिनों में मांगी गई रिपोर्ट

नई दिल्ली, 31 अक्तूबर 2025 । दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष एवं रोहिणी विधानसभा क्षेत्र (AC-13) के विधायक विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के ज़ोनल रेवेन्यू ऑफिस (ZRO) को सेक्टर-6, रोहिणी से लगभग 20 किलोमीटर दूर नरेला स्थानांतरित किए जाने से क्षेत्र के निवासियों को हो रही असुविधा पर संज्ञान लिया है।

रोहिणी क्षेत्र के नागरिकों ने गुप्ता से भेंट कर इस निर्णय पर आपत्ति दर्ज कराई और अनुरोध किया कि उक्त कार्यालय को पुनः उसके पुराने स्थान, सेक्टर-6, रोहिणी में पुनः स्थापित किया जाए। नागरिकों ने बताया कि इस स्थानांतरण के कारण वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और कामकाजी परिवारों को जल आपूर्ति, बिलिंग एवं सीवरेज संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।

इन शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेते हुए गुप्ता ने दिनांक 24.10.2025 को दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि सेक्टर-6, रोहिणी स्थित पुराने कार्यालय को तत्काल बहाल किया जाए। उन्होंने उल्लेख किया कि यह कार्यालय पिछले चार दशकों से अधिक समय से क्षेत्र की जनता को कुशलतापूर्वक सेवाएं प्रदान कर रहा था और इसके नरेला स्थानांतरण से हजारों नागरिकों को भारी असुविधा हो रही है।

गुप्ता के पत्र के उत्तर में दिल्ली जल बोर्ड के सदस्य (वित्त) ने दिनांक 28.10.2025 को निदेशक (राजस्व) को निर्देशित किया कि उक्त अनुरोध का परीक्षण कर सात दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) श्री विजेंद्र गुप्ता एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, डीजेबी को प्रस्तुत की जाए। उक्त पत्र में यह भी कहा गया कि नागरिकों की वास्तविक असुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम प्राथमिकता से उठाए जाएं।

गुप्ता ने कहा कि यह मुद्दा इस बात की ओर संकेत करता है कि शासन की प्रत्येक नीति और निर्णय में नागरिकों की सुविधा केंद्र में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक दक्षता तभी सार्थक है जब वह जनता की पहुँच और सुविधा के अनुरूप हो, विशेषकर उन विभागों के लिए जो आवश्यक नागरिक सेवाएं प्रदान करते हैं।

गुप्ता ने पुनः आश्वस्त किया कि दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष एवं रोहिणी के निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में जनता की सुविधाओं की रक्षा करना उनका सर्वोच्च कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रशासनिक निर्णय को सुशासन और लोक कल्याण के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को सर्वोपरि रखना आवश्यक है।

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