विश्व शांति, न्याय और मानव गरिमा के संवर्धन के प्रति समर्पण के लिए पोप लियो-14 को सम्मानित किया गया – डॉ. आदीश सी. अग्रवाल

Date:

  •  नई दिल्ली में अपोस्टोलिक ननसियो द्वारा ग्रहण किया गया अंतरराष्ट्रीय जूरिस्ट्स शांति पुरस्कार–2025

नई दिल्ली, 29 अक्तूबर 25 । पोप लियो-14 को विश्व शांति, अंतरधार्मिक सद्भाव, मानव गरिमा और न्याय के संवर्धन में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ ज्यूरिस्ट्स (ICJ), लंदन के अध्यक्ष डॉ. आदीश सी. अग्रवाल द्वारा अंतरराष्ट्रीय जूरिस्ट्स शांति पुरस्कार–2025 से सम्मानित किया गया।

यह सम्मान आज नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामय समारोह में वेटिकन (Holy See) के अपोस्टोलिक ननसियो आर्कबिशप लियोपोल्डो गिरेली द्वारा ग्रहण किया गया।
इस अवसर पर अनेक प्रतिष्ठित न्यायविद और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे, जिनमें डॉ. न्यायमूर्ति के.जी. बालाकृष्णन, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति वीरेन्द्र सिंह, झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, तथा के.डी. सिंह, भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग के पूर्व सचिव, प्रमुख रूप से शामिल थे।

अपने संबोधन में डॉ. आदीश सी. अग्रवाल, अध्यक्ष, इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ ज्यूरिस्ट्स, ने कहा कि यह शांति पुरस्कार पोप लियो-14 की “विश्वभर में शांति, न्याय और मानव गरिमा के संवर्धन के प्रति उनके गहन और आजीवन समर्पण” का सम्मान है। उन्होंने पोप को “मानवता के लिए एक नैतिक दिशा-सूचक – ऐसी अंतरात्मा की आवाज़ बताया जो विश्व को उसके मूलभूत मूल्यों – शांति, दया और न्याय – की ओर लौटने का आह्वान करती है।”

डॉ. अग्रवाल ने यह भी कहा कि आईसीजे ने यह समारोह भारत में आयोजित करने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि “भारत एक ऐसा धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है जो सभी धर्मों को समान रूप से सम्मान देता है।” उन्होंने उल्लेख किया कि “ईसाई धर्म सबसे पहले भारत में आया था, बहुत पहले, जब वह अभी विश्व के अन्य हिस्सों में नहीं फैला था।” उन्होंने आगे कहा, “पोप लियो-14 का सम्मान करते हुए हम करुणा की उस चिरस्थायी शक्ति का सम्मान करते हैं जो राष्ट्रों को जोड़ती है, और यह स्वीकार करते हैं कि दया के बिना न्याय अधूरा है।”

अपोस्टोलिक ननसियो आर्कबिशप लियोपोल्डो गिरेली, जिन्होंने पोप की ओर से यह शांति पुरस्कार स्वीकार किया, ने कहा कि “इस विशिष्ट सम्मान के लिए पवित्र पिताश्री (Holy Father) अत्यंत आभारी हैं।” उन्होंने आईसीजे की न्याय एवं विधि के शासन को प्रोत्साहन देने की प्रतिबद्धता की सराहना की और कहा कि यह पुरस्कार पोप लियो-14 के उस वैश्विक संदेश की मान्यता है जो “जनजातियों और समुदायों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करने, मानव गरिमा की रक्षा करने, भ्रातृत्व और मेल-मिलाप को बढ़ाने, तथा न्याय और शांति के लिए कार्य करने” का आह्वान करता है।

ननसियो ने इस वर्ष राजनयिक समुदाय को संबोधित पोप लियो-14 के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि मानवता के लिए मार्गदर्शक तीन शब्द होने चाहिए — शांति, न्याय और सत्य, क्योंकि केवल इन्हीं के माध्यम से आधुनिक विश्व में सामंजस्य और स्थायी सह-अस्तित्व संभव हो सकता है।

अपने वक्तव्य में डॉ. न्यायमूर्ति के.जी. बालाकृष्णन, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, ने कहा कि पोप लियो-14 का जीवन “शांति, न्याय, करुणा और मानवता के उत्थान के प्रति आजीवन समर्पण” का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि पोप की आवाज़ “धर्म, जाति और विचारधाराओं के विभाजन से भरे इस युग में आशा और मेल-मिलाप का दीपस्तंभ बनकर उभरी है।”

न्यायमूर्ति वीरेन्द्र सिंह, झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, ने पोप को “एक ऐसे आलोकित व्यक्तित्व” के रूप में वर्णित किया जो मानवता को उसके साझा नैतिक आधार की पुनः खोज के लिए प्रेरित करते हैं।
उन्होंने कहा कि “जब कानून को करुणा का मार्गदर्शन प्राप्त होता है, तब वह शांति का सर्वोत्तम साधन बन जाता है।”

के.डी. सिंह, भारत सरकार के विधायी विभाग के पूर्व सचिव, ने कहा कि “विधि का शासन तभी अपने सर्वोच्च उद्देश्य को प्राप्त करता है जब वह मानवता की नैतिक चेतना को प्रतिबिंबित करे।” उन्होंने जोड़ा कि “पोप का संदेश आस्था और सीमाओं से परे है — यह हमें विभाजन के स्थान पर संवाद और उदासीनता के स्थान पर सहानुभूति अपनाने की प्रेरणा देता है।”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related