फोकस: रतन टाटा के जाने के बाद टाटा ग्रुप में विवाद — प्रबंधन कलह बढ़ी, सरकार को देनी पड़ी दखल

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नई दिल्ली, 09 अक्टूबर 2025 । रतन टाटा के सक्रिय नेतृत्व से हटने के बाद देश के सबसे प्रतिष्ठित औद्योगिक समूहों में से एक, टाटा ग्रुप, एक बड़े विवाद में घिर गया है। समूह के शीर्ष प्रबंधन और बोर्ड सदस्यों के बीच बढ़ते मतभेद अब सार्वजनिक हो गए हैं, जिससे न केवल कंपनी की साख पर असर पड़ा है, बल्कि सरकार को भी हस्तक्षेप करना पड़ा है।

रतन टाटा की आज पहली डेथ एनिवर्सरी है। पिछले साल 9 अक्टूबर 2024 को 86 साल की उम्र में उनका निधन हुआ था। इसके बाद टाटा ग्रुप में लीडरशिप से लेकर कई बड़े बदलाव हुए हैं। इसके अलावा उनके जाने के बाद से ग्रुप में कई विवाद भी चल रहे हैं।

1. रतन टाटा के निधन के बाद विवाद

रतन टाटा के निधन के बाद अक्टूबर 2024 में उनके सौतेले भाई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट का चेयरमैन बनाया गया। वहीं नवंबर 2024 में नोएल को टाटा संस के बोर्ड में भी शामिल किया गया। लेकिन कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया यह फैसला ट्रस्ट के भीतर एकमत नहीं था।

इससे टाटा संस को कंट्रोल करने वाले टाटा ट्रस्ट्स में बोर्ड सीट को लेकर सीधा-सीधा बंटवारा हो गया। एक गुट बोर्ड मेंबर नोएल टाटा के साथ है, तो दूसरा गुट मेहली मिस्त्री के साथ। मिस्त्री का कनेक्शन शापूरजी पल्लोनजी फैमिली से है जिसकी टाटा संस में 18.37% हिस्सेदारी है।

टाटा संस की बोर्ड सीट को लेकर हुए विवाद के बीच 7 अक्टूबर को सीनियर लीडरशिप ने गृहमंत्री अमित शाह के घर पर 45 मिनट की मीटिंग की। एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कहा कि घरेलू झगड़े को जल्द निपटा लिया जाए, ताकि कंपनी पर असर न हो।

मीटिंग में गृहमंत्री शाह, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के साथ टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा शामिल हुए। अब टाटा ट्रस्ट्स बोर्ड की 10 अक्टूबर को मीटिंग होगी।

5 पॉइंट में समझें टाटा ग्रुप का पूरा विवाद

  • ये पूरा झगड़ा टाटा ट्रस्ट्स की 11 सितंबर को हुई मीटिंग से शुरू हुआ। इसमें टाटा संस के बोर्ड पर पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह को नॉमिनी डायरेक्टर के तौर पर दोबारा अपॉइंट करने पर बात होनी थी। लेकिन मीटिंग में सिंह नहीं आए। टाटा ट्रस्ट्स के सिंह समेत कुल सात ट्रस्टी हैं।
  • टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा के 9 अक्टूबर 2024 को निधन के बाद ट्रस्ट्स ने फैसला लिया था कि टाटा संस बोर्ड पर नॉमिनी डायरेक्टर्स को 75 साल की उम्र के बाद हर साल दोबारा अपॉइंट करना पड़ेगा। 77 साल के सिंह 2012 से ये रोल निभा रहे थे।
  • री-अपॉइंटमेंट का ये रेजोल्यूशन नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन ने रखा था। लेकिन बाकी चार लोग- मेहली मिस्त्री, प्रामित झावेरी, जहांगीर एचसी जहांगीर और डेरियस खंबाटा ने साफ मना कर दिया। चूंकि ये चारों मेजॉरिटी में थे तो रेजोल्यूशन रद्द हो गया।
  • इसके बाद इन ट्रस्टीज ने मेहली मिस्त्री को ही टाटा संस बोर्ड पर नॉमिनी के तौर पर प्रपोज करने की कोशिश की। लेकिन नोएल टाटा और श्रीनिवासन ने रोक दिया। मीटिंग खत्म होते ही सिंह ने टाटा संस बोर्ड से खुद ही इस्तीफा दे दिया।
  • मेहली मिस्त्री के नेतृत्व वाले चार ट्रस्टी शापूरजी पलोनजी फैमिली से जुड़े हैं। इस फैमिली की टाटा संस में 18.37% हिस्सेदारी है। पीटीआई के मुताबिक, मेहली ने महत्वपूर्ण फैसलों से बाहर रखे जाने पर नाराजगी जताई है। झगड़े का केंद्र टाटा संस में डायरेक्टरशिप के पद हैं।

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