गांधी और शास्त्री स्वतंत्रता संग्राम और स्वतंत्र भारत के निर्माण के दो मार्गदर्शक स्तंभ थे- मोहन सिंह बिष्ट

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  •  दिल्ली विधानसभा में महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर आयोजित किया गया पुष्पांजलि समारोह
  •  महात्मा गांधी की दिल्ली विधानसभा में ऐतिहासिक उपस्थिति को किया गया याद
  •  लाल बहादुर शास्त्री की निष्ठा और नेतृत्व पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर 2025 । दिल्ली विधानसभा ने आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री एवं महान स्वतंत्रता सेनानी लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती के अवसर पर हृदयपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित की। महात्मा गांधी की 156वीं जयंती और लाल बहादुर शास्त्री की 121वीं जयंती के अवसर पर आयोजित पुष्पांजलि समारोह में दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष श्री मोहन सिंह बिष्ट उपस्थित रहे, जिन्होंने उनके अदम्य साहस, बलिदान और राष्ट्र के प्रति योगदान को याद किया। समारोह में दिल्ली विधानसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्कूल के विद्यार्थी भी शामिल हुए जिन्होंने इन दूरदर्शी नेताओं को पुष्पांजलि अर्पित कर समारोह को न केवल श्रद्धापूर्ण बनाया बल्कि युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक भी बना दिया।

इस अवसर पर दिल्ली विधानसभा उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने कहा, “महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री स्वतंत्रता संग्राम और स्वतंत्र भारत के निर्माण के दो मार्गदर्शक स्तंभ थे। इस ऐतिहासिक विधानसभा में स्वयं महात्मा गांधी उपस्थित हुए थे, जिन्होंने दो बार कार्यवाही में भाग लिया, जिससे ये हॉल उनके स्थायी योगदान का मौन साक्षी बन गए है। शास्त्री ने हमें सादगी, विनम्रता और दृढ़ संकल्प से राष्ट्र को बदलने का मार्ग दिखाया। उनका जीवन यह स्मरण कराता है कि सच्चा नेतृत्व जनसेवा और मातृभूमि के लिए बलिदान में निहित है।”

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के अद्भुत शस्त्रों के साथ स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया, और लाखों लोगों को उपनिवेशवादी शासन के खिलाफ आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उनका अहिंसा और सत्याग्रह का सिद्धांत न केवल स्वतंत्रता के संघर्ष में देश को एकजुट किया बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति और न्याय का मार्गदर्शन भी बना। उनका दृष्टिकोण आज भी भारत को समानता, सद्भाव और समावेशी समाज निर्माण की दिशा में मार्गदर्शन करता है।

भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री अपनी ईमानदारी, विनम्रता और अटूट संकल्प के लिए सदैव स्मरण किए जाते हैं। उनका नारा “जय जवान, जय किसान” देश की सुरक्षा और कृषि आत्मनिर्भरता दोनों के लिए प्रेरक बना। कठिन परिस्थितियों में उनका त्याग, निष्ठा और दूरदर्शी नेतृत्व राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक रहा जो आज भी नई पीढ़ियों को प्रेरित करता है।

दिल्ली विधानसभा में आयोजित यह समारोह न केवल भारत के इन दो महानायकों को श्रद्धांजलि देने का अवसर था, बल्कि उनके आदर्शों–सत्य, अहिंसा, सादगी और सेवा भावना–को आत्मसात करने का संकल्प भी था।विधानसभा ने इस अवसर पर यह संकल्प दोहराया कि गांधी और शास्त्री की विरासत को आगे बढ़ाते हुए एक मजबूत, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसेवा की भावना को निरंतर सुदृढ़ किया जाएगा।

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