रामलीलाएं भारतीय संस्कृति की आत्मा है – प्रवेश वर्मा

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  1.  द्वारका श्री रामलीला सोसाइटी में भक्ति, आस्था और मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्शों का अद्भुत प्रदर्शन

नई दिल्ली । 27 सितम्बर 25 । द्वारका श्री रामलीला सोसायटी (पंजी.) द्वारा आयोजित 14वीं द्वारका श्री रामलीला मंचन एवं भव्य मेला का छठी रात्रि का मंचन 27 सितम्बर 2025, शनिवार को अत्यंत भव्यता, श्रद्धा और सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। द्वारका के आकाश में “जय श्री राम” के जयकारों से गूंजते वातावरण में हजारों की संख्या में उपस्थित राम भक्तों ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की लीला का रसपान किया।
इस वर्ष की रामलीला का आयोजन द्वारका श्री रामलीला सोसायटी के चेयरमैन एवं मुख्य संरक्षक आकाश राजेश गहलोत के सशक्त नेतृत्व में किया जा रहा है। उनके मार्गदर्शन और टीम के अथक प्रयासों से यह आयोजन न केवल एक धार्मिक पर्व बन चुका है, बल्कि यह सामाजिक एकता, भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण का सशक्त माध्यम भी बन गया है।
इस पावन अवसर पर दिल्ली सरकार के केबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने मंच से द्वारका श्री रामलीला सोसायटी की सराहना करते हुए कहा कि, “रामलीला केवल एक नाटक नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो समाज को धर्म, नीति और आदर्शों का पाठ पढ़ाती है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपने संस्कारों से जोड़ते हैं।”
मंचन की प्रमुख झलकियाँ :
भरत-केकई संवाद : मातृत्व और धर्म के बीच का मर्मस्पर्शी दृश्य
लीला का प्रारंभ भरत-केकई संवाद से हुआ। जब भरत अयोध्या लौटते हैं और उन्हें ज्ञात होता है कि श्री राम वनवास गए हैं और महाराज दशरथ का देहांत हो चुका है, तो उनके हृदय में क्रोध, दुःख और ग्लानि का ज्वार उमड़ पड़ता है। केकई और भरत का संवाद न केवल मातृत्व के द्वंद्व को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सच्चा पुत्र वह है जो धर्म का पालन करता है, भले ही उसका हृदय कितना ही विचलित क्यों न हो। इस दृश्य ने सम्पूर्ण दर्शकों की आंखों को नम कर दिया।
चित्रकूट पर राम-भरत मिलन :। भक्ति, प्रेम और त्याग का अद्भुत संगम
छठी रात्रि का सबसे भावुक दृश्य रहा चित्रकूट पर राम-भरत मिलन। यह दृश्य जब मंच पर आया, तो पूरा पंडाल “जय श्री राम” के नारों से गूंज उठा। भरत का चरण पकड़कर विलाप करना, राम का उन्हें गले लगाना और दोनों भाइयों का धर्म संवाद – यह दृश्य इतना हृदयस्पर्शी था कि उपस्थित हर व्यक्ति भावविभोर हो उठा। यह मिलन केवल दो भाइयों का नहीं, बल्कि सत्य और प्रेम का संगम था।
सुर्पनखा प्रसंग : अहंकार और वासना पर मर्यादा का प्रहार
इसके बाद मंच पर प्रस्तुत हुआ सुर्पनखा प्रसंग। जब सुर्पनखा श्री राम और लक्ष्मण को मोहित करने का प्रयास करती है और उसके अपमानजनक व्यवहार के कारण लक्ष्मण उसकी नाक काट लेते हैं, तब यह दृश्य समाज को यह शिक्षा देता है कि मर्यादा और धर्म की सीमा का उल्लंघन करने वाले को दंड अवश्य मिलता है। मंचन के इस भाग ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
खर-दूषण वध : अधर्म पर धर्म की विजय
लीला का समापन हुआ खर-दूषण वध के रोमांचक दृश्य के साथ। जब रावण के भाई खर-दूषण अपने असुर दल के साथ श्री राम पर आक्रमण करते हैं, तब श्री राम अपने धनुष-बाण से धर्म की रक्षा करते हुए उन दुष्टों का वध करते हैं। इस दृश्य ने राम के दिव्य स्वरूप और धर्म की शक्ति को भव्य रूप से प्रस्तुत किया।
सांस्कृतिक और धार्मिक माहौल
पूरे परिसर में दीपों की रौशनी, जयकारों की गूंज और मंच पर सजावट का अद्भुत संगम देखने को मिला। हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालु परिवारों सहित रामलीला का आनंद लेते रहे। बच्चों के लिए झूले, खाने-पीने के स्टॉल और भव्य मेला आयोजन को और भी आकर्षक बना रहे हैं।
आयोजकों का संदेश
आकाश राजेश गहलोत ने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल रामलीला का मंचन करना नहीं, बल्कि रामायण के आदर्शों को समाज में जीवंत करना है। जिस प्रकार श्री राम ने मर्यादा, सत्य और करुणा के पथ पर चलकर विश्व को धर्म की शिक्षा दी, उसी प्रकार हम भी इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं।”
निष्कर्ष
द्वारका श्री रामलीला सोसाइटी 2025 की छठी रात्रि का मंचन न केवल मनोरंजन का साधन रहा, बल्कि यह भक्ति, नीति, और संस्कारों की जीवंत पाठशाला बन गया। भरत की निष्ठा, केकई का पश्चाताप, सुर्पनखा का दंड, और राम की धर्म रक्षा – इन सभी दृश्यों ने यह संदेश दिया कि धर्म की राह कठिन अवश्य होती है, परंतु वही सत्य की राह है।
जय श्री राम

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