रामलीलाएं आने वाली पीढ़ियों को सकारात्मक सोच और आदर्श जीवन की प्रेरणा देती है है – रेखा गुप्ता

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  •  द्वारका श्री रामलीला सोसाइटी मे सीता जन्म, ताड़का वध और अहिल्या उद्धार के मंचन ने भक्ति और आस्था से सरोबार किया

नई दिल्ली । 24 सितम्बर 25 । भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक बन चुकी द्वारका श्री रामलीला इस वर्ष अपने 14वें संस्करण में पूरे भव्य रूप से आयोजित की जा रही है। द्वारका सेक्टर-10 स्थित विशाल मैदान में हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन भगवान श्रीराम की लीला का साक्षात्कार कर रहे हैं। आयोजन का श्रेय जाता है द्वारका श्री रामलीला सोसायटी (पंजी.) और इसके मुख्य संरक्षक एवं चेयरमैन आकाश राजेश गहलोत को, जिनके अथक प्रयासों से यह रामलीला राजधानी की सबसे बड़ी और सबसे लोकप्रिय रामलीलाओं में शुमार हो चुकी है।

तीसरे दिन का मंचन : 24 सितम्बर 2025, बुधवार
तीसरी रात्रि का मंचन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव लेकर आया। इस दिन सीता जन्म, ताड़का वध और अहिल्या उद्धार जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का जीवंत मंचन किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।
सीता जन्म : धरती माता के गर्भ से बालिका सीता का प्रकट होना दृश्यावलोकन करने वालों के लिए किसी अलौकिक चमत्कार से कम नहीं लगा। माता सीता के अवतरण के साथ ही पूरा पंडाल “जय सिया राम” के उद्घोष से गूंज उठा।
ताड़का वध : गुरु विश्वामित्र के आदेश पर भगवान श्रीराम द्वारा राक्षसी ताड़का का वध धर्म और मर्यादा की रक्षा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस प्रसंग ने यह संदेश दिया कि धर्म की स्थापना और समाज की रक्षा के लिए साहस एवं कर्तव्य पालन सर्वोपरि है।
अहिल्या उद्धार : पत्थर बनी अहिल्या के उद्धार का मंचन इतना भावुक था कि दर्शकों की आंखें नम हो उठीं। जब प्रभु श्रीराम के चरणों के स्पर्श से अहिल्या पुनः अपने वास्तविक स्वरूप में लौटीं, तब पूरा वातावरण भक्ति और आंसुओं से सराबोर हो गया।

माननीय अतिथियों की उपस्थिति : मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री
24 सितम्बर की रात का आयोजन और भी विशेष तब बन गया जब दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा भारत सरकार के आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, दिल्ली सरकार मे स्वास्थ्य मंत्री डॉ पंकज कुमार सिंह आदि मुख्य अतिथि के रूप में पंडाल में पहुंचे।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा –
“द्वारका की यह रामलीला दिल्ली की सबसे बड़ी और अनुकरणीय रामलीलाओं में से एक है। इसकी नींव रखने वाले महान आत्मा स्व. राजेश गहलोत को मेरा कोटि-कोटि नमन। उनके संस्कारों और संकल्पों को आज उनके सुपुत्र आकाश राजेश गहलोत ने एक भव्य रूप प्रदान किया है। यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता का भी अद्वितीय उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों को सकारात्मक सोच और आदर्श जीवन की प्रेरणा देता है।”
प्रतापराव जाधव ने भी इस अवसर पर रामलीला मंचन की सराहना करते हुए कहा –
“रामलीला केवल आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, कर्तव्य और आदर्श जीवन का जीवंत पाठशाला है। द्वारका श्री रामलीला अपने वैभव और अनुशासन से पूरे देश में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। यह देखकर प्रसन्नता होती है कि नई पीढ़ी इस आयोजन के माध्यम से अपने मूल्यों और परंपराओं से जुड़ रही है।”

आकाश राजेश गहलोत : परंपरा से आधुनिकता का संगम
इस आयोजन के सूत्रधार श्री आकाश राजेश गहलोत अपने पिता स्व. राजेश गहलोत की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। स्व. गहलोत ने जिस बीज को बोया था, उसे आज आकाश राजेश गहलोत ने अपने अथक प्रयास, संगठन कौशल और अटूट श्रद्धा से वटवृक्ष बना दिया है। उनकी दूरदर्शिता के कारण द्वारका श्री रामलीला न केवल दिल्ली बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष पहचान बना चुकी है।

भव्यता और अनुशासन का अद्भुत उदाहरण
इस वर्ष की रामलीला में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक भाव का अद्वितीय संगम देखने को मिला। मंच पर 3D प्रकाश व्यवस्था, अत्याधुनिक ध्वनि प्रणाली और आकर्षक सेट्स ने लीला को और भी जीवंत बना दिया। वहीं, दर्शकों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विशाल बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता और चिकित्सा सेवाओं का विशेष ध्यान रखा गया।
संस्कृति और समाज को जोड़ने वाला उत्सव
द्वारका श्री रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह समाज को जोड़ने और संस्कृति को सशक्त बनाने का भी माध्यम है। यहाँ प्रस्तुत हर प्रसंग बच्चों और युवाओं को यह सिखाता है कि धर्म, सत्य और न्याय की राह पर चलना ही जीवन का सच्चा आदर्श है।

निष्कर्ष
24 सितम्बर 2025 की तीसरी रात्रि का मंचन – सीता जन्म, ताड़का वध और अहिल्या उद्धार – द्वारका श्री रामलीला के इतिहास में अविस्मरणीय बन गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और भी बढ़ा दिया। वहीं, श्री आकाश राजेश गहलोत के नेतृत्व और संकल्प ने यह प्रमाणित किया कि श्रद्धा और परिश्रम से कोई भी आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव का आधार बन सकता है।

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