रामलीलायें हमारी संस्कृति, आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के चरित्र से प्रेरणा प्राप्त करने का माध्यम है – मनोज तिवारी।

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  • द्वारका की रामलीला पूरे देश को धर्म और राष्ट्रगौरव का संदेश देने का कार्य कर रही है – प्रवेश वर्मा
  • पहले दिन की मंचन लीला ने सभी दर्शकों को भावविभोर किया |
  • मनोज तिवारी द्वारा राम कथा के द्वारा रामलीला मंचन की शुरूआत हुई

नई दिल्ली । 22 सितम्बर 25 । भारतवर्ष की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की जीवंत धरोहर, श्रीरामलीला का महापर्व द्वारका की पवित्र धरती पर अत्यंत श्रद्धा, आस्था और भव्यता के साथ आरंभ हुआ। इस महोत्सव का आयोजन द्वारका श्री रामलीला सोसायटी द्वारा किया जा रहा है, जिसके चेयरमैन एवं मुख्य संरक्षक श्री आकाश राजेश गहलोत तथा उनकी समर्पित टीम ने इस अद्वितीय आयोजन को साकार करने के लिए दिन-रात अथक परिश्रम किया।

पहली रात्रि का मंचन : वाल्मीकि कृत रामायण से लेकर रावण की तपस्या तक

22 सितम्बर 2025, सोमवार की रात्रि को प्रारंभ हुई प्रथम संध्या की लीला दर्शकों के लिए अविस्मरणीय सिद्ध हुई। कथा का प्रारंभ महर्षि वाल्मीकि द्वारा रामायण रचना से हुआ। इसके पश्चात लीला में विश्रवा और केकसी का विवाह, रावण का जन्म, उसका कठोर तप और अंततः स्वर्णमयी लंका प्राप्त करने तक के प्रसंगों का सजीव मंचन प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के सटीक अभिनय, भव्य परिधानों, मनोहारी मंच सज्जा तथा प्रकाश-ध्वनि संयोजन ने दर्शकों को मानो त्रेतायुग में पहुँचा दिया।

गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर लोकसभा सांसद मनोज तिवारी एवं दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में मनोज तिवारी ने कहा कि “रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि यह हमारी संस्कृति, आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के चरित्र से प्रेरणा प्राप्त करने का माध्यम है।”
वहीं श्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने कहा कि “द्वारका की रामलीला दिल्ली ही नहीं, पूरे देश को धर्म और राष्ट्रगौरव का संदेश देने का कार्य कर रही है।”
कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक गणमान्य अतिथि, समाजसेवी, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएँ एवं युवा भारी संख्या में सम्मिलित हुए। सभी ने मिलकर इस दिव्य आयोजन को सफल बनाने में अपनी भागीदारी निभाई।

विशेष आकर्षण : ब्रह्मॉस द्वार से आकाश द्वार तक

इस वर्ष की रामलीला में एक विशेष और अनूठी पहल की गई। प्रवेश द्वारों को राष्ट्र की शक्ति और गौरव को समर्पित नाम दिए गए — ब्रह्मॉस द्वार, रुद्रम द्वार, तेजस द्वार और आकाश द्वार। यह चारों द्वार भारतीय सेना की सामरिक शक्ति और आत्मनिर्भर भारत की सामर्थ्य का प्रतीक बने।
आयोजकों ने इस पहल को भारत के ऑपरेशन ‘सिंदूर’ को समर्पित किया और इसके माध्यम से पूरे राष्ट्र को एक सकारात्मक और प्रेरणादायी संदेश दिया कि जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने धर्म और सत्य की रक्षा के लिए युद्ध किया, उसी प्रकार आज का भारत भी अपनी शक्ति और संकल्प से किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम है।
श्रद्धालुओं का उत्साह और भव्य मेला
राम भक्तों के लिए न केवल दिव्य मंचन प्रस्तुत किया गया, बल्कि मैदान में लगे भव्य मेले और झूलों ने भी लाखों दर्शकों का मन मोह लिया।
श्रद्धालु परिवार सहित इस आयोजन में पहुँचे और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने एक साथ धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उल्लास का आनंद लिया। वातावरण “जय श्रीराम” के उद्घोषों से गूंज उठा और हर ओर उल्लास, भक्ति और देशभक्ति की अनूठी झलक देखने को मिली।

आयोजन की विशेषताएँ

मंच सज्जा और सेट डिज़ाइन में अत्याधुनिक तकनीक और पारंपरिक कलात्मकता का संगम।
राष्ट्र समर्पित चार द्वारों की अनूठी परिकल्पना, जो दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रही।
संगीत, संवाद और अभिनय का अद्वितीय तालमेल जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
स्थानीय बच्चों और युवाओं को भी मंचन में अवसर देकर सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ा गया।

भविष्य की झलक

आयोजकों के अनुसार, आगामी दिनों में रामायण के विभिन्न प्रसंग जैसे राम जन्म, सीता स्वयंवर, वनवास, रावण वध और रामराज्याभिषेक की प्रस्तुतियाँ मंचित की जाएँगी। आयोजन समिति ने दर्शकों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म, संस्कृति और कला के इस महापर्व को सफल बनाने का आह्वान किया है।
इस प्रकार द्वारका की पावन भूमि पर श्रीरामलीला महोत्सव का प्रारंभ न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि भारतीय संस्कृति, कला, राष्ट्र गौरव और आस्था का जीवंत उत्सव है, जो आने वाली पीढ़ियों को श्रीराम के आदर्शों से प्रेरित करता रहेगा।

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