भारत दंत शोध और नवाचार का केंद्र साबित किया हुआ है – प्रो. (डॉ.) महेश वर्मा

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  •  आईएडीआर-आईएसडीआर 2025 नई दिल्ली में सम्पन्न – दंत शोध

नई दिल्ली, 21 सितम्बर 2025। आईएडीआर एशिया पैसिफिक रीजनल कॉन्फ्रेंस एवं इंडियन सोसाइटी फॉर डेंटल रिसर्च (ISDR) का 35वां वार्षिक सम्मेलन नई दिल्ली में सम्पन्न हुआ। तीन दिवसीय इस वैज्ञानिक सम्मेलन ने दंत स्वास्थ्य शोध को मज़बूत करने और इसे वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में शामिल करने का सशक्त संदेश दिया।
पहली बार दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन में 22 देशों से 600 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें से 150 अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी थे और इनमें 100 जापान से आए थे। यह आयोजन विश्वस्तरीय विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और युवा वैज्ञानिकों के लिए सीखने, सहयोग और नवाचार का अनूठा मंच बना। सम्मेलन में 36 श्रेणियों में दंत और क्रैनियोफेशियल रिसर्च प्रस्तुत किया गया।

मुख्य आकर्षण

  • वैश्विक प्रतिनिधित्व: ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, श्रीलंका, ताइवान, थाईलैंड, इंडोनेशिया, वियतनाम, फिलीपींस, हांगकांग, चीन, तुर्की, दक्षिण अफ्रीका, कंबोडिया, ब्रिटेन, अमेरिका और भारत से प्रतिभागी शामिल हुए। जापान डिवीज़न के प्रो. मिकाको हायाशी, कोरिया डिवीज़न की डॉ. युंगनिम चोई और साउथ ईस्ट एशिया डिवीज़न के प्रो. होआंग ट्रॉन्ग हांग व डॉ. खाई कुआंग दाओ की भागीदारी विशेष रही।
  • शोध की प्राथमिकताएँ: जापान इस समय जेनेटिक और माइक्रोबायोलॉजी में छात्रों के शोध को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन दे रहा है, जबकि भारत के शोध मुख्य रूप से क्लिनिकल अध्ययन और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर केंद्रित है। विशेषज्ञों ने कहा कि इन दोनों धाराओं को जोड़ने के लिए कोलैबोरेटिव रिसर्च की आवश्यकता है।
  • सरकारी मान्यता: भारत सरकार इस क्षेत्र के महत्व को लगातार मान्यता दे रही है। केवल 2024 में ही 430 प्रोजेक्ट्स दंत स्वास्थ्य क्षेत्र में स्वीकृत किए गए। हालांकि, विशेषज्ञों ने ज़ोर दिया कि दंत चिकित्सा को बीमा योजनाओं में शामिल करने और सरकारी डॉक्टरों के पैनल में दंत चिकित्सकों की नियुक्ति अत्यावश्यक है। साथ ही, छात्र शोध को सहयोग देना भविष्य की स्थायी व्यवस्था के लिए बेहद ज़रूरी है।
  •  हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग: प्रतिभागियों को वैश्विक विशेषज्ञों के साथ इंटरैक्टिव वर्कशॉप्स और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग का लाभ मिला, जिससे उन्हें नई तकनीकों और शोध पद्धतियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।

  • उत्कृष्टता का सम्मान:
    * प्रो. एस.एस. सिद्धू अवॉर्ड (सर्वश्रेष्ठ पोस्टर) – डॉ. प्रिया खंडेलवाल
    * आईएसडीआर टी.आर. सरस्वती मेडल (सर्वश्रेष्ठ मौलिक वैज्ञानिक शोध पत्र) – डॉ. दर्शना राम
    * प्रो. बी. सुब्बापति अवॉर्ड (सर्वश्रेष्ठ फैकल्टी रिसर्च पेपर) – डॉ. मदन राज
    * इन पुरस्कारों ने छात्रों और शिक्षकों दोनों के बीच नवाचार और उत्कृष्टता को सम्मानित किया।
    * सम्मेलन नेतृत्व: वैलेडिक्टरी समारोह में मंच पर प्रो. सरंजीत सिंह भसीन (आयोजन सचिव), प्रो. महेश वर्मा (आयोजन अध्यक्ष एवं कुलपति, जीजीएसआईपीयू), प्रो. पामेला येलिक (अध्यक्ष, IADR), डॉ. ऋतु दुग्गल (अध्यक्ष, ISDR), डॉ. विजय माथुर (उपाध्यक्ष, ISDR) और डॉ. अजय लोगानी (वैज्ञानिक अध्यक्ष) उपस्थित रहे ।

समापन विचार
प्रो. (डॉ.) महेश वर्मा, आयोजन अध्यक्ष एवं कुलपति, जीजीएसआईपीयू, ने कॉन्फ्रेंस रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा:
“यह सम्मेलन वैश्विक सहयोग की शक्ति को दर्शाता है। 600 से अधिक प्रतिनिधियों, 150 अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी के साथ भारत ने एक बार फिर खुद को दंत शोध और नवाचार का केंद्र साबित किया है। प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप्स नौ प्रमुख विषयों पर आयोजित हुईं—जिनमें रिसर्च, एआई फॉर ट्रांसलेशनल रिसर्च और साइंटिफिक पेपर राइटिंग शामिल रहे। कुल 49 अंतरराष्ट्रीय और 32 राष्ट्रीय वक्ताओं ने 12 सिम्पोज़िया में भाग लिया, 40 प्रदर्शनियाँ और अंतरराष्ट्रीय पोस्टर प्रस्तुत किए गए तथा शोधार्थियों और फैकल्टी द्वारा 206 फ्री पेपर्स प्रस्तुत किए गए। यह सम्मेलन वास्तव में शोध, नवाचार और ज्ञान का उत्सव रहा।”


प्रो. पामेला येलिक, अध्यक्ष, IADR, ने कहा:
“एशिया पैसिफिक क्षेत्र दंत शोध में सबसे गतिशील क्षेत्रों में से एक है। जेनेटिक्स से लेकर क्लिनिकल साइंस तक, यहाँ प्रस्तुत विविध शोध वैश्विक दंत स्वास्थ्य का भविष्य तय करेंगे। आईएडीआर का प्रयास रहेगा कि शोधकर्ताओं के लिए सुविधाएँ और अवसर और अधिक सुलभ बनाए जाएँ।”
डॉ. ऋतु दुग्गल, अध्यक्ष, ISDR, ने कहा:
“इस आयोजन ने युवा शोधकर्ताओं को अवसर दिया, नेटवर्क बनाए और यह साबित किया कि शोध सिर्फ़ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रह सकता, इसे समुदायों तक पहुँचाना ही असली उद्देश्य है। हमें भारतीय शोध को वैश्विक मंच तक पहुँचाने के लिए लगातार प्रयास करते रहना होगा।”
डॉ. विजय माथुर, उपाध्यक्ष, ISDR, ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कहा कि छात्रों की भागीदारी और सामुदायिक पहुँच को और सशक्त करना हमारी अगली प्राथमिकता होगी।

भारतीय डेंटिस्ट्री के लिए ऐतिहासिक पड़ाव
विचारों के आदान-प्रदान, महत्वपूर्ण शोध अनुदानों की घोषणा और युवा प्रतिभाओं के सम्मान के साथ IADR-ISDR 2025 एक ऊँचे मुकाम पर सम्पन्न हुआ—और भारत को वैश्विक मंच पर क्लिनिकल एवं ट्रांसलेशनल डेंटल रिसर्च का उभरता हुआ केंद्र स्थापित किया।

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