हिंदी देश का गौरव और भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान – रविन्द्र इंद्राज

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  •  नई पीढ़ी को हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओँ और साहित्य से जोड़ना जरूरी

नई दिल्ली । 14 सितम्बर 25 । हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक है। यह विश्व में भारत की पहचान और गर्व का आधार है। नई पीढ़ी तक हमें हिंदी की समृद्ध विरासत को पहुँचाना है। हिंदी दिवस के अवसर पर रोहिणी सेक्टर-14 स्थित सरल ज्ञान स्कूल में आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के समाज कल्याण मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह ने यह बात कही। उन्होंने अभिभावकों एवं शिक्षकों से हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओँ को छात्र-छात्राओं के बीच बढ़ावा देने का आग्रह किया।

रविन्द्र इन्द्राज ने कहा कि हिंदी विश्व की तीसरी सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा है। भारत के अलावा मॉरीशस, फ़िज़ी, नेपाल, सूरीनाम, त्रिनिदाद, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन सहित अनेक देशों में करोड़ों लोग हिंदी बोलते और समझते हैं। यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वैश्विक नेतृत्व और प्रयासों से विश्व में इसकी लोकप्रियता और बढ़ी है।

कैबिनेट मंत्री ने कहा की डिजिटल मीडिया, फ़िल्म, टीवी, पत्रकारिता और इंटरनेट पर हिंदी की उपस्थिति लगातार बढ़ रही है। ई-कॉमर्स, मोबाइल ऐप्स और सोशल मीडिया में हिंदी कंटेंट करोड़ों उपभोक्ताओं को जोड़ रहा है, इसलिए हिंदी में अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार देने के भरपूर अवसर हैं।

समाज कल्याण मंत्री ने कहा की हिंदी के पास गौरवशाली इतिहास और विश्वस्तरीय साहित्य है। विश्व के प्रमुख विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाती है, जो इसकी बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रमाण है। उन्होंने बच्चों को हिंदी सीखने और इसके प्रयोग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर विशेष जोर दिया।

वार्षिकोत्सव में छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति और सांस्कृतिक विविधता से परिपूर्ण आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्हें कैबिनेट मंत्री ने सराहते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं। उन्होंने प्रतिभागी छात्रों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधन, अभिभावक और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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