Gen-Z प्रदर्शनकारियों ने नेपाली पीएम सुशीला कार्की का इस्तीफा मांगा

Date:

काठमांडू , 15 सितम्बर 2025 : नेपाल में Gen-Z प्रदर्शनकारियों ने अंतरिम पीएम सुशीला कार्की का इस्तीफा मांगा है। वे कैबिनेट विस्तार को लेकर नाराज हैं। प्रदर्शनकारियों ने रविवार रात पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन और नारेबाजी की।

उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार प्रदर्शनकारियों की राय लिए बिना मंत्रियों को चुन रही है। इसका नेतृत्व सुदान गुरुंग कर रहे थे।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीनियर वकील ओमप्रकाश आर्यल सरकार में दखलअंदाजी कर रहे हैं। गुरुंग का आरोप है कि आर्यल ने खुद को गृहमंत्री बनाने का फैसला किया है। ओमप्रकाश आर्यल काठमांडू के मेयर बालेन शाह के करीबी माने जाते हैं।

पीएम कार्की ने ओमप्रकाश आर्यल को गृह और कानून मंत्री, रामेश्वर खनाल को वित्त मंत्री और कुलमान घिसिंग को ऊर्जा मंत्री नियुक्त किया है।

गुरुंग ने नेपाल में Gen-Z आंदोलन का ऐलान किया था

36 साल के गुरुंग ने 8 सितंबर को काठमांडू में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था। वे हामी नेपाल नाम के NGO के संस्थापक हैं।

2015 में बना यह संगठन आपदाओं के दौरान राहत पहुंचाने के लिए जाना जाता है। भूकंप और बाढ़ जैसी आपात स्थितियों में इसके सदस्य बचाव, भोजन और पानी की व्यवस्था करते रहे हैं।

संगठन ने समय-समय पर छात्रों और प्रवासी नेपाली नागरिकों से जुड़े मुद्दे भी उठाए हैं। इसी साल भुवनेश्वर में एक नेपाली छात्रा की आत्महत्या के मामले में भी ‘हामी नेपाल’ ने खुलकर आवाज उठाई थी और सोशल मीडिया पर लगातार अपडेट साझा किए थे।

दिलचस्प यह है कि यह संगठन आमतौर पर राजनीतिक विवादों से दूरी बनाए रखता है। इसके इंस्टाग्राम पेज पर ज्यादातर मानवीय गतिविधियों की ही झलक मिलती है। ऐसे में काठमांडू विरोध का ऐलान गुरुंग के रुख में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

गुरुंग का नाम पहली बार राजनीतिक विवाद में तब आया था, जब उन्होंने शिक्षक भर्ती घोटाले पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि योग्य उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर पैसे और राजनीतिक दबाव के जरिए भर्तियां की जा रही हैं। इसी प्रकरण के बाद उन पर जानलेवा हमला भी हुआ था।

Gen-Z आंदोलन के बाद नेपाल की पार्टियों पर संकट

नेपाल की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की नियुक्ति और संसद के भंग होने के बाद अब सियासी पार्टियों के भीतर ही असंतोष तेज हो गया है।

बड़े दलों के दिग्गज नेता अपनी-अपनी पार्टियों में घिर गए हैं और इस्तीफे का दबाव बढ़ रहा है। नेपाली कांग्रेस, CPN-UML और माओवादी केंद्र सहित 8 प्रमुख दलों ने संसद भंग करने को असंवैधानिक करार दिया है।

शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस, केपी शर्मा ओली की CPN-UML और पुष्प कमल दहल प्रचंड की CPN (माओवादी सेंटर) के युवा नेताओं ने अपने शीर्ष नेताओं से पद छोड़ने की मांग शुरू कर दी है।

नेताओं पर इस्तीफा देने का दबाव

नेपाली कांग्रेस के भीतर गगन थापा और बिश्व प्रकाश शर्मा खुलकर शेर बहादुर देउबा से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वहीं, UML में शंकर पौडेल और योगेश भट्टराई सुधार की मांग उठाकर पार्टी अध्यक्ष पर दबाव बना रहे हैं।

माओवादी केंद्र में जनार्दन शर्मा ने कहा, प्रचंड अब नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपें। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नेता कार्की को सीधे निशाना बनाने से बच रहे हैं, लेकिन जनता और कार्यकर्ताओं के दबाव के चलते उन्हें अपनी ही पार्टी में जवाब देना पड़ रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related