सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान: पूरे देश को साफ हवा का हक, पटाखों पर लगाया बैन की जरूरत पर जोर

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नई दिल्ली, । 12 सितम्बर 2025 । भारत में प्रदूषण लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। विशेष रूप से दीपावली और अन्य उत्सवों के समय पटाखों के कारण वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पूरे देश के नागरिकों को साफ हवा में सांस लेने का मौलिक अधिकार है और इसके लिए देशभर में पटाखों पर बैन होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
  • कोर्ट ने कहा कि संविधान के तहत नागरिकों को स्वस्थ जीवन और स्वच्छ वातावरण का अधिकार मिला है।

  • प्रदूषण फैलाने वाले कारकों पर रोक लगाना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

  • पटाखों से निकलने वाले रसायन स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरनाक हैं।

  • अदालत का मानना है कि यदि दिल्ली और कुछ राज्यों में पटाखों पर प्रतिबंध लगाया गया है, तो इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए।

क्यों जरूरी है पटाखों पर बैन?
  1. वायु प्रदूषण – पटाखों से निकलने वाला धुआं और गैसें वायु गुणवत्ता को बेहद खराब कर देती हैं।

  2. ध्वनि प्रदूषण – पटाखों की तेज आवाज़ बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को प्रभावित करती है।

  3. स्वास्थ्य पर असर – अस्थमा, एलर्जी, आंखों और सांस की समस्याओं वाले मरीजों की हालत बिगड़ जाती है।

  4. जानवरों पर असर – पटाखों की आवाज़ और प्रदूषण से पालतू और आवारा जानवरों को मानसिक तनाव होता है।

  5. आग और हादसों का खतरा – पटाखों से हर साल सैकड़ों दुर्घटनाएँ होती हैं।

राज्यों और केंद्र की जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

  • केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर पटाखों पर एक समान नीति बनाएं।

  • ग्रीन पटाखों (कम प्रदूषण वाले) को बढ़ावा दिया जा सकता है, लेकिन उनकी भी सीमा तय हो।

  • पुलिस और प्रशासन को बाजारों और त्योहारों पर सख्ती से निगरानी करनी होगी।

  • लोगों को जागरूकता अभियान के जरिए समझाया जाए कि त्यौहार मनाने के और भी पर्यावरण मित्र विकल्प हैं।

वैकल्पिक उपाय
  • दीपावली और अन्य उत्सवों में दीये, लाइट्स और सामूहिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर जोर दिया जा सकता है।

  • इको-फ्रेंडली सजावट और पारंपरिक तरीकों से त्यौहार मनाने को प्रोत्साहित किया जाए।

  • बच्चों और युवाओं को पटाखों की जगह सांस्कृतिक गतिविधियों और खेलों में जोड़ा जाए।

सुप्रीम कोर्ट का यह बयान स्पष्ट करता है कि स्वच्छ हवा केवल सुविधा नहीं बल्कि मौलिक अधिकार है। पटाखों पर बैन न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगा बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य को भी सुरक्षित रखेगा। यदि पूरे देश में यह निर्णय लागू होता है तो आने वाली पीढ़ियों को प्रदूषण से मुक्त, बेहतर और स्वस्थ वातावरण मिलेगा।

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