विधि स्नातकों को “न्यायालय के अधिकारी और संविधान के संरक्षक” बनना चाहिए – न्यायमूर्ति बी.वी. नागरथ्ना

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  • न्याय ही हमारे संविधान और लोकतंत्र की आत्मा है- आशीष सूद
  •  राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली ने 12वाँ दीक्षांत समारोह मनाया

नई दिल्ली, । 6 सितम्बर 2025 । राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली ने आज अपने 12वें दीक्षांत समारोह में यूनिवर्सिटी के बच्चों को दीक्षा उपरांत डिग्रियां प्रदान की । यह कार्यक्रम राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय द्वारका के प्रांगण में मनाया गया। यह विधि शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता की यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है ।

इस अवसर न्यायमूर्ति बी.वी. नागरथ्ना (न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय एवं विज़िटर, एनएलयू दिल्ली), न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय (मुख्य न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय एवं कुलाधिपति, एनएलयू दिल्ली), आशीष सूद (गृह, शिक्षा, विद्युत, शहरी विकास, उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण व तकनीकी शिक्षा मंत्री, दिल्ली सरकार), न्यायमूर्ति ओमप्रकाश शुक्ला (न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय), न्यायमूर्ति वी. क़ामेश्वर राव (न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय), न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी (अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधीश, सिंगापुर अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक न्यायालय एवं पूर्व न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय), प्रो. बी.बी. पांडे (विख्यात विधि विद्वान एवं पूर्व प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय) तथा धर्मेन्द्र (मुख्य सचिव, दिल्ली सरकार) उपस्थित रहे।

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरथ्ना ने दीक्षांत भाषण में विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि यह उपाधि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि संविधानिक मूल्यों की रक्षा और समाज की सेवा का आह्वान है। उन्होंने स्नातकों को “न्यायालय के अधिकारी और संविधान के संरक्षक” बनने का संदेश दिया तथा नैतिकता और सत्यनिष्ठा को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने बदलते सामाजिक, तकनीकी और पर्यावरणीय परिदृश्यों में विधि की नई चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को नवाचार, न्याय और जनसेवा की भावना से कार्य करने का आह्वान किया।

मंत्री आशीष सूद ने अपने संबोधन में इस अवसर को न केवल स्नातकों बल्कि उनके माता-पिता और शिक्षकों के लिए भी ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने उपनिषद का संदेश “सा विद्या या विमुक्तये” उद्धृत करते हुए कहा कि सच्ची शिक्षा वही है जो व्यक्ति को स्वतंत्र और समाजोपयोगी बनाए। उन्होंने विद्या और धर्म के अभिन्न संबंध पर बल देते हुए कहा कि विधि की शिक्षा पाने वाले विद्यार्थी समाज और संविधान के प्रति विशेष दायित्व निभाने के लिए तैयार रहें। साथ ही उन्होंने माता-पिता के त्याग को बच्चों की सफलता का असली आधार बताया।

सूद ने कहा की आज आप में से कुछ कॉरपोरेट बोर्डरूम में प्रवेश करेंगे, तो कुछ भीड़भरे न्यायालयों में न्याय के लिए खड़े होंगे। चाहे मंच कोई भी हो, याद रखिए समाज तभी टिकेगा जब न्याय मिलेगा। न्याय ही हमारे संविधान और लोकतंत्र की आत्मा है।

शिक्षा मंत्री ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के कथन को कोट करते हुए कहा की
“संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि उसे चलाने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे, तो वह असफल होगा। और यदि लोग अच्छे होंगे, तो एक साधारण संविधान भी सफल होगा। आज से यह जिम्मेदारी आप सबके कंधों पर है।

उन्होंने आगे कहा की याद रखिए आपकी डिग्री केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह समाज का आप पर किया गया निवेश और विश्वास है। कल जब आप वास्तविक बहसों और मुकदमों का सामना करेंगे, तो आपकी पहचान केवल ‘वकील’ नहीं, बल्कि न्याय के प्रहरी के रूप में होगी।

कुलपति प्रो. (डॉ.) जी.एस. बजपेयी ने अपने स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, अनुसंधान संस्कृति, शिक्षा में समान अवसरों के विस्तार और अंतर्राष्ट्रीयकरण की पहल का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय लगातार आठवें वर्ष भारत सरकार की एनआईआरएफ रैंकिंग 2025 में दूसरे स्थान पर रहा है। प्रो. बजपेयी ने बताया कि दिवालियापन, बौद्धिक संपदा कानून, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लीगल टेक्नोलॉजी जैसे नवाचारों ने एनएलयू दिल्ली को विधि शिक्षा का अग्रणी संस्थान बनाया है।

न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने विभिन्न कार्यक्रमों पीएच.डी., एलएल.एम., संयुक्त मास्टर/एलएल.एम./एम.ए. एवं बी.ए.एलएल.बी.(ऑनर्स) के 269 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की। इसके साथ ही 31 पदक और 9 नगद पुरस्कार भी वितरित किए गए।

सर्वश्रेष्ठ छात्र पुरस्कार: पुलकित गोयल एवं धवल हेमेश शेट (बी.ए.एलएल.बी.)

कुलपति पदक (सर्वश्रेष्ठ छात्रा): अनीशा शर्मा (बी.ए.एलएल.बी.), विभूति शर्मा (एलएल.एम.)

कुलपति पदक (सर्वश्रेष्ठ छात्र): अमन सैनी (बी.ए.एलएल.बी.), अंकित आनंद (एलएल.एम.)

प्रथम स्थान: हिमांशी रघुवंशी (एलएल.एम.), संच्या बंसल (एलएल.एम.–जेएमएल)

इस गरिमामय अवसर पर न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी और प्रो. बी.बी. पांडे को विधि एवं शिक्षा क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए “डॉक्टर ऑफ लॉज़ (ऑनोरिस कॉज़ा)” की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

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