गढ़वाली-कुमाऊंनी-जौनसारी भाषाओं की ग्रीष्मकालीन कक्षाओं के शिक्षकों के सम्मान समारोह में हुई शामिल
नई दिल्ली, 7 सितंबर 2025 । दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि उनकी सरकार सभी क्षेत्रीय भाषाओं और संस्कृतियों को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उत्तराखंडी समाज के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं को दिल्ली की नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य न केवल भाषाओं का संरक्षण है बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सुंदर माध्यम है। मुख्यमंत्री ने यह विचार आज गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं की ग्रीष्मकालीन कक्षाओं के शिक्षकों के सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।


इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बाबा बद्री विशाल और बाबा केदारनाथ का स्मरण करते हुए कहा कि मातृभाषा से बड़ा कोई वरदान नहीं होता। वह पहला शब्द, जो मां आपके कानों में बोलती है, वही जीवन का आधार बनता है। मातृभाषा हमारी सोच, संस्कृति और पहचान की नींव है। उन्होंने कहा कि दिल्ली एक ‘मिली-जुली संस्कृति’ का केंद्र है, जहां सभी राज्यों और संस्कृतियों का संगम होता है। यही दिल्ली की खूबसूरती है कि यहां हर त्योहार और परंपरा पूरे उत्साह और भाईचारे के साथ मनाया जाता है। मुख्यमंत्री ने दिल्ली सरकार द्वारा गढ़वाली भाषा अकादमी के पुनर्जीवन और उत्तराखंड दिवस जैसे कार्यक्रमों को आयोजित करने की पहल का भी उल्लेख किया और कहा कि दिल्ली में रहकर भी अपनी मातृभूमि और मातृभाषा से जुड़े रहना सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि इस प्रयास से दिल्ली में विविधता और समरसता का अनूठा संगम और मजबूत होगा। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आप सब अपनी जन्मभूमि की भाषा और संस्कृति को दिल्ली में जीवित रखकर, न केवल अपने बच्चों को पहचान दे रहे हैं, बल्कि दिल्ली को और समृद्ध बना रहे हैं। कार्यक्रम में उत्तराखंड भाषा प्रदेश मंत्री विनोद बछेती, लोक भाषा एवं साहित्य मंच के पदाधिकारी, शिक्षक, छात्र और बड़ी संख्या में संस्कृति प्रेमी उपस्थित थे।
