लाल किला परिसर से ₹1 करोड़ का कलश चोरी

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नई दिल्ली ।  06 सितम्बर 25 । देश की ऐतिहासिक धरोहर और यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट लाल किला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार कारण है – परिसर से करीब ₹1 करोड़ मूल्य का प्राचीन कलश चोरी होना। यह कलश लाल किला के अंदर स्थित एक ऐतिहासिक संरचना का हिस्सा बताया जा रहा है। चोरी की इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्थाओं और पुरातत्व संरक्षण विभाग (ASI) की जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह घटना मंगलवार, 2 सितंबर को एक जैन धर्म के धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हुई। दिल्ली पुलिस ने 6 सितंबर को घटना की जानकारी दी है। कलश की चोरी का CCTV फुटेज भी सामने आया है।

पुलिस ने बताया कि बिजनेसमैन सुधीर जैन हर दिन पूजा के लिए कलश लाते थे। पिछले मंगलवार को भी वे पूजा के लिए कलश लाए थे। कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी शामिल हुए थे।

ओम बिरला के स्वागत की अफरातफरी के बीच कलश मंच से गायब हो गया। CCTV फुटेज में एक संदिग्ध की गतिविधियां दिखाई दी हैं। उसकी पहचान कर ली गई है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।

चोरी की घटना कैसे हुई?

सूत्रों के अनुसार, यह चोरी रात के समय हुई जब लाल किला परिसर में नियमित गश्त कम थी।

  • चोरों ने संरचना की ऊपरी हिस्से पर लगा धातु का कलश तोड़कर निकाल लिया।

  • इसकी जानकारी सुबह सुरक्षा कर्मियों ने निरीक्षण के दौरान दी।

  • तुरंत ASI और दिल्ली पुलिस को मामले की सूचना दी गई।

चोरी हुए कलश का महत्व

यह कलश केवल धातु का एक टुकड़ा नहीं था, बल्कि भारतीय इतिहास और शिल्पकला की अनमोल धरोहर था।

  • विशेषज्ञों का मानना है कि यह कलश 17वीं शताब्दी का हो सकता है।

  • इसका मूल्यांकन बाजार में ₹1 करोड़ से अधिक का बताया जा रहा है।

  • ऐतिहासिक दृष्टि से यह और भी अधिक महत्वपूर्ण था क्योंकि यह मुगलकालीन स्थापत्य कला का हिस्सा था।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

लाल किला देश का प्रतीक है और यहां प्रतिदिन हजारों पर्यटक आते हैं। इसके बावजूद चोरी होना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

  • 24×7 सुरक्षा और CCTV निगरानी के बावजूद यह घटना कैसे हुई?

  • क्या गश्ती व्यवस्था लापरवाह रही?

  • क्या चोरी में किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका हो सकती है?

जांच और पुलिस की कार्रवाई

दिल्ली पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर लिया है और स्पेशल सेल को जांच सौंपी है।

  • आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

  • सुरक्षाकर्मियों और ठेकेदारों से पूछताछ शुरू कर दी गई है।

  • पुलिस को शक है कि चोरी एक संगठित गिरोह ने की होगी, जो पुरावशेषों की तस्करी से जुड़ा हो सकता है।

राजनीतिक और जन प्रतिक्रियाएँ
  • विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर लाल किला जैसे संरक्षित स्मारक में चोरी हो सकती है तो छोटे स्मारकों की स्थिति क्या होगी।

  • इतिहासकारों और संरक्षण कार्यकर्ताओं ने ASI से मांग की है कि तुरंत सुरक्षा बढ़ाई जाए और सभी स्मारकों का ऑडिट किया जाए।

लाल किला सिर्फ एक स्मारक नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता और स्वतंत्रता संघर्ष का प्रतीक है। ऐसे में वहां से किसी भी धरोहर का चोरी होना राष्ट्रीय शर्म की बात है।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि ASI और CISF की संयुक्त टीम स्मारकों की सुरक्षा की समीक्षा करेगी।

लाल किला से कलश की चोरी यह दिखाती है कि सिर्फ विरासत को संरक्षित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। अगर सुरक्षा में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में कई और ऐतिहासिक धरोहरें खतरे में पड़ सकती हैं।

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