अमेरिका का वेनेजुएला की नाव पर हमला, 11 की मौत

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वाशिंगटन ,। 04 सितम्बर 25 ।   लैटिन अमेरिका में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। खबरों के अनुसार, अमेरिका की एक सैन्य कार्रवाई में वेनेजुएला की एक नाव पर हमला हुआ, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई। यह घटना कैरेबियाई सागर के पास हुई, जहां कथित तौर पर अमेरिकी नौसेना ने संदेह के आधार पर नाव को निशाना बनाया।

अब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने खुलासा किया है कि खुद ट्रम्प ने नाव पर हमला करने का आदेश दिया था।

यह हमला मंगलवार को कैरिबियन सागर में हुआ था। रुबियो ने कहा कि वे चाहते तो उस नाव को सीज कर सकते थे, लेकिन ट्रम्प ने इसके बजाय उसे उड़ाने का आदेश दिया।

रुबियो ने कहा कि सिर्फ ड्रग्स की खेप जब्त करने से कार्टेल पर असर नहीं पड़ने वाला है। उन्हें खत्म करना है तो उन्हें उड़ाना ही होगा।

रुबियो ने यह भी कहा कि नाव पर मौजूद लोगों को कोई चेतावनी नहीं दी गई क्योंकि वह ‘कोकीन या फेंटेनाइल’ ड्रग से भरी हुई थी। यह अमेरिका के लिए सीधा खतरा थी।

ट्रम्प बोले- अब वे दोबारा ऐसा नहीं करेंगे

इससे पहले राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया कि जहाज पर ‘ट्रेन डे अरागुआ गिरोह’ के सदस्य थे। अमेरिका इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है। ट्रम्प ने दावा किया कि नाव पर भारी मात्रा में ड्रग्स था।

पहली बार अमेरिका ने बोट को निशाना बनाया

अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने अब तक इस हमले के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। रक्षा विभाग के एक अधिकारी ने तो यहां तक सवाल उठाया कि क्या इतनी छोटी नाव में सचमुच 11 लोग बैठ सकते थे।

यह भी स्पष्ट नहीं है कि सेना ने नाव को रोकने के बजाय उसे उड़ाने का फैसला क्यों किया। आमतौर पर तटरक्षक बल या अमेरिकी नौसेना ड्रग्स से लदी नावों को पकड़कर चालक दल को हिरासत में लेती रही है और उन पर मुकदमा भी चलता रहा है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिकी नौसेना पहले भी अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संदिग्ध जहाजों को रोकती और उनकी जांच करती रही है। लेकिन मंगलवार को कैरिबियन सागर में हुआ यह हमला बिल्कुल अलग था, क्योंकि इस बार सीधा हमला किया गया।

ट्रम्प प्रशासन ने इस कार्रवाई का कोई कानूनी तर्क नहीं दिया। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने टीवी चैनल पर कहा कि अधिकारियों को पूरी जानकारी थी कि नाव में कौन लोग थे और वे क्या कर रहे थे। हालांकि, उन्होंने कोई सबूत नहीं दिखाया।

अमेरिकी अधिकारियों के बयानों में अंतर

हालांकि, रक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों ने प्रशासन के बदलते बयानों पर चिंता जताई। रुबियो ने मंगलवार को कहा था कि नाव त्रिनिदाद जा रही थी, जबकि ट्रम्प ने कहा था कि वह अमेरिका जा रही थी।

पेंटागन अब यह तय करने में लगा है कि जनता को किस कानूनी आधार पर यह समझाया जाए कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुए इस हमले को कैसे जायज ठहराया जाए।

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी संसद ने ट्रेन डे अरागुआ या वेनेजुएला के खिलाफ किसी तरह की सैन्य कार्रवाई को मंजूरी नहीं दी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि उन्होंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा जब किसी देश ने आत्मरक्षा के नाम पर ड्रग्स तस्करी के शक में लोगों को उड़ा दिया हो।

रुबियो ने मंगलवार को कहा था कि सरकार को ड्रग तस्करों के खिलाफ सैन्य बल इस्तेमाल करने का अधिकार मिलता है। लेकिन कानून के जानकारों का कहना है कि ऐसा नहीं है। आतंकवादी घोषित करने से सरकार उनकी संपत्ति जब्त कर सकती है या उन पर वित्तीय पाबंदी लगा सकती है, लेकिन युद्ध जैसी कार्रवाई का अधिकार नहीं मिलता।

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