शिक्षा बिल के पास होने से पेरेंट्स को मिलेगा वीटो पावर – आशीष सूद

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  •  1973 के कानून की खामी खत्म, अब दिल्ली के सभी 1700 निजी स्कूल आएंगे फीस नियंत्रण के दायरे में

नई दिल्ली । 15 अगस्त 25 । दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने जनकपुरी विधानसभा में अभिभावकों के साथ एक “पैरेंट्स टाउन हॉल” नामक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जिसमे मंत्री महोदय ने दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता) विधेयक, 2025 के लाभों के बारे में बताया।

संवाद कार्यक्रम में शिक्षा बिल से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पेरेंट्स के साथ साझा की गई जैसे शिक्षा बिल कैसे लागू किया गया। इस बिल में पेरेंट्स के क्या अधिकार है और पेरेंट्स इस ऐतिहासिक बदलाव का हिस्सा कैसे बन सकते हैं। इन सभी पहलुओं पर अभिभावकों को विस्तृत जानकारी भी दी गई।

इस संवाद कार्यक्रम में जनकपुरी के लगभग 200 अभिभावकों ने के साथ शिक्षा बिल पर चर्चा की और बिल के कई पहलुओं पर विस्तृत जानकारी भी ली।

अभिभावकों ने मंत्री को बिल से संबंधित अपने कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए और बिल के संबंध में उनकी जो आशंकाएं हैं उनके समाधान के लिए मंत्री महोदय से आग्रह किया कि वह शीघ्र इस संबंध में समय देकर इन आशंकाओं का समाधान करें ।

शिक्षा मंत्री ने अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि राजधानी के सभी बच्चों को अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी और कोई भी बच्चा आर्थिक कारणों से वंचित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्कूल दिल्ली की जरूरत हैं, लेकिन फीस निर्धारण में पारदर्शिता और जवाबदेही भी अनिवार्य है।

मंत्री ने संवाद कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावकों को बताया कि विधानसभा के मानसून सत्र में ‘दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) विधेयक 2025’ बहुमत से पारित हो गया है। यह बिल निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाकर फीस निर्धारण में पारदर्शिता, अभिभावकों की सशक्त भागीदारी और फीस वृद्धि पर वीटो पावर सुनिश्चित करेगा। इस विल में प्रावधान रखा गया है की कोई भी स्कूल यदि सरकार की बिना अनुमति के फीस बढ़ाएगा तो उस पर 1 से 10 लाख रुपये का जुर्माना और अतिरिक्त वसूली की रकम न लौटाने पर दोगुना दंड भी देना होगा। शिक्षा निदेशक को एसडीएम जैसी शक्तियां देकर सभी स्कूलों पर एक समान कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
मंत्री महोदय ने कहा कि पिछली सरकारें शिक्षा क्षेत्र में न तो कोई पारदर्शिता ही लाई और न ही फीस नियंत्रण का कोई मजबूत तंत्र और कानून ही बनाया गया था। जो अपने को शिक्षा क्रांति के जनक बताते थे उन्होंने सिर्फ शराब घोटाला ही किया। हमारी सरकार ने अभिभावकों और कई शिक्षा विदों से चर्चा कर यह बिल तैयार किया है, जो शिक्षा के व्यवसायीकरण को तो रोकेगा ही साथ ही बच्चों के सपनों की रक्षा करेगा।

उन्होंने पेरेंट्स को बताया की निजी स्कूलों की फीस तय करने की प्रक्रिया में अब माता-पिता और अन्य हितधारकों की सीधी भागीदारी और भूमिका होगी। जिससे फीस निर्धारण में न केवल पारदर्शिता आएगी बल्कि पेरेंट्स पर अनाप शनाप फीस का बोझ भी नही पड़ेगा।

मंत्री महोदय ने कहा की पेरेंट्स ने अपने बच्चों को निजी स्कूल में इसलिए भेजा था क्योंकि पिछली सरकार ने “शिक्षा क्रांति” के नाम पर वास्तव में शिक्षा में कोई सुधार नहीं किया सिर्फ विज्ञापन दिखा कर लोगों को भ्रमित ही किया था।

उन्होंने कहा की यदि सरकारी स्कूलों में बेहतर कक्षाएँ, माहौल और सुविधाएँ होती तो कोई भी पेरेंट्स अपने बच्चे की ₹10,000 मासिक फीस नहीं देता। नए कानून में फीस तय करने के कई स्टेकहोल्डर होंगे जैसे अभिभावक, छात्र, शिक्षक, गैर-शैक्षिक स्टाफ और स्कूल प्रबंधन और सरकार की प्रतिनिधि।

सूद ने स्पष्ट किया की कि दिल्ली में 1700 निजी स्कूलों में 1973 के कानून की खामी से केवल 300 स्कूलों की फीस तय होती थी। लेकिन इस नए क़ानून से सभी निजी स्कूल फीस निर्धारण के दायरे में आ गए है। नई प्रक्रिया के तहत अब समयसीमा भी तय कर दी गयी है जैसे 15 जुलाई तक समिति का फैसला, 30 जुलाई तक जिला स्तर पर निर्णय और सितंबर तक अंतिम निर्णय। अगर 45 दिन में भी फैसला नहीं होता, तो मामला अपीलीय समिति में जाएगा।

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