‘वस्त्र कथा 2025’ में CM रेखा गुप्ता की अपील – हैंडलूम पहनें और नेशनल हैंडलूम डे को गर्व के साथ राष्ट्रीय त्योहार की तरह मनाएं
हमारा लक्ष्य हैंडलूम को हर घर तक पहुंचाना है, इसे सिर्फ परंपरा तक सीमित न रखकर एक फैशन आइकन बनाना है।” – मनजिंदर सिंह सिरसा
नई दिल्ली,। 6 अगस्त 2025 । दिल्ली ने वस्त्र कथा 2025 के साथ भारत की हैंडलूम विरासत का भव्य उत्सव देखा। नेशनल हैंडलूम डे के अवसर पर आयोजित इस खास कार्यक्रम में अशोक होटल में दिनभर चली प्रदर्शनी में भारत के बेहतरीन हैंडलूम और खादी उत्पादों का प्रदर्शन हुआ। इसके बाद फैशन शो हुआ, जिसने स्वदेशी कपड़ों की ताकत, खूबसूरती और स्थिरता को दुनिया के सामने पेश किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्लीवासियों से हैंडलूम अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा,
“हम अपने देश के प्रति प्यार स्वदेशी कपड़ा पहनकर भी दिखा सकते हैं। प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ विजन ने हमें सिखाया है कि हमें अपनी धरोहर – खादी, बुनकरों और इस उद्योग में काम करने वाले लाखों लोगों – में निवेश क्यों करना चाहिए। जम्मू-कश्मीर से लेकर तमिलनाडु तक, हर राज्य का कपड़ा अपनी एक अलग कहानी कहता है। मैं गर्व से अलग-अलग राज्यों की हैंडलूम साड़ियां पहनती हूं और चाहती हूं कि दिल्ली की सभी बहनें इस संस्कृति को अपनाएं।”
उन्होंने आगे कहा,
“हम विदेशी ब्रांड्स पर हजारों रुपये खर्च करते हैं, जबकि हमारी अपनी हैंडलूम दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करती है। मैं हर दिल्लीवासी से अपील करती हूं कि अपने हैंडलूम आउटफिट्स की फोटो सोशल मीडिया पर डालें, मुझे टैग करें और इंडियन हैंडलूम का समर्थन करें। हम मिलकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं, अपने कारीगरों का साथ दे सकते हैं और अपनी विरासत का जश्न मना सकते हैं।”

उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने डिजाइनर्स और कारीगरों का आभार व्यक्त करते हुए कहा,
“हमारा लक्ष्य हैंडलूम को हर घर तक पहुंचाना है, इसे सिर्फ परंपरा से बढ़ाकर फैशन आइकन बनाना है। आज यहां जो काम हुआ है, उसकी चर्चा पूरे दिल्ली और उससे बाहर होगी।” उन्होंने आगे बताया कि जल्द ही सभी डिजाइनर्स के खास हैंडलूम कलेक्शन लॉन्च किए जाएंगे, ताकि इस कला को और आगे बढ़ाया जा सके।
भारत की हैंडलूम विरासत का उत्सव
प्रदर्शनी में देशभर से आए 24 अनोखे स्टॉल्स ने भारत की हैंडलूम विरासत की झलक दिखाई। यहां जीआई-टैग्ड टेक्सटाइल्स, लाइव बुनाई के प्रदर्शन और बारीक कढ़ाई के नमूने रखे गए थे। बनारस के मोहम्मद सलाम अंसारी की असली जरी वाली बनारसी साड़ियां, मोहन वर्गीस की कांचीपुरम और मैसूर सिल्क, लद्दाख का पश्मीना, तेलंगाना का इकत, मेघालय का एरी सिल्क, नागालैंड का चगन मासी शॉल, बिहार का तसर सिल्क व मधुबनी प्रिंट और गुजरात का पटोला व डबल इकत जैसी कलाकृतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। भांग, बांस और ऑर्गेनिक कॉटन से बने सस्टेनेबल फैब्रिक ने भी लोगों का ध्यान खींचा।

कारीगरों ने दिल्ली सरकार का आभार जताया। मोहम्मद सलाम अंसारी ने कहा, “हमारी पीढ़ियां इस कला को जिंदा रखे हुए हैं। यह मंच हमें गर्व और पहचान देता है।” मोहन वर्गीस ने कहा, “कुछ साड़ियां एक साल में तैयार होती हैं, जिनमें चांदी और सोने के धागे हाथ से बुने जाते हैं। इन्हें यहां दिखाना हमारे लिए सम्मान की बात है।”
भव्य फैशन शो रहा मुख्य आकर्षण
शाम को आयोजित स्पेशली क्यूरेटेड फैशन शो ने खादी और हैंडलूम के सफर को प्राचीन जड़ों से लेकर आधुनिक ग्लोबल ट्रेंड्स तक बखूबी प्रस्तुत किया। शो में कई थीमेटिक प्रस्तुतियां हुईं, जिनमें शामिल थीं:
• “खादी – एक वैदिक वरदान” – ऋषि-मुनियों की परंपराओं से प्रेरित हैंडस्पन फैब्रिक।
• “भारत – विविधता में एकता” – गुजरात, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और मेघालय की साड़ियों का प्रदर्शन।
• “पंजाब दे रंग खुशियों दे संग” – सत्यम फैशन इंस्टीट्यूट की प्रस्तुति।
• “दिल्ली मार्चेस अहेड” – कॉर्पोरेट दुनिया में हैंडलूम की एंट्री।
• “बनारसी श्रृंगार” – बनारसी साड़ियों का शाश्वत आकर्षण।
• “द नाइन यार्ड्स वांडर” – पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक और तमिलनाडु समेत नौ राज्यों की साड़ियों का प्रदर्शन।
• “खादी और हैंडलूम गोज़ इंटरनेशनल” – सामंत चौहान की प्रस्तुति, जिसमें स्वदेशी कपड़े को आधुनिक अंतरराष्ट्रीय फैशन में ढाला गया।
डिजाइनर्स राहुल मिश्रा, संजय गर्ग, गौरव शाह, रीना ढाका और विजय माथुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खादी को प्रमोट करने में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
इस कार्यक्रम में विदेशी राजनयिकों, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, दिल्ली कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, कपिल मिश्रा के साथ-साथ कई विधायक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
वस्त्र कथा 2025 ने यह संदेश दिया कि खादी और हैंडलूम न केवल भारत के अतीत का गौरव हैं, बल्कि स्थायी फैशन, सांस्कृतिक गर्व और आर्थिक सशक्तिकरण का भविष्य भी हैं।
