- सीएम ने छात्रों को शिक्षा के साथ समाज और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाने का किया आह्वान
- उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के 15 वर्षों में नहीं खुला एक भी नया कॉलेज • हमारी सरकार करेगी शैक्षणिक व्यवस्था का कायाकल्प
नई दिल्ली । 2 अगस्त 2025 । दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय के शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिज़नेस स्टडीज़ के 39वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री के रूप में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि देश के भविष्य को गढ़ने का सबसे बड़ा केंद्र हमारे कॉलेज हैं और छात्र ही देश के सबसे बड़े भाग्यविधाता हैं।

मुख्यमंत्री ने न केवल कॉलेज में दाखिला लेने वाले छात्रों को शुभकामनाएं दीं, बल्कि उन्हें शिक्षा की असली भावना को आत्मसात कर समाज और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि 140 करोड़ लोगों में से हर व्यक्ति अगर देश के लिए एक छोटा सा काम भी कर ले, तो भारत को विश्व का सर्वश्रेष्ठ देश बनने से कोई नहीं रोक सकता। कार्यक्रम में सांसद श्री योगेंद्र चंदोलिया, विधायक कुलवंत राणा सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉलेज की पढ़ाई सिर्फ डिग्री लेने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने विचार, ऊर्जा और सहभागिता के माध्यम से देश की राजनीति और नीति-निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा बनें। साथ ही मुख्यमंत्री ने छात्रों से आग्रह किया कि वे दिल्ली सरकार के स्कूलों से जुड़ें और वहां पढ़ने वाले वंचित बच्चों के साथ संवाद करें। उन्होंने कहा कि जब आप जैसे छात्र झुग्गियों के बच्चों से जुड़ेंगे, तो उन्हें एक विज़न, एक प्रेरणा मिलेगी। हम सब मिलकर तभी आगे बढ़ सकते हैं जब हम अपने पीछे वालों का हाथ पकड़ें।

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर अफसोस जताया कि पिछले 15 वर्षों में दिल्ली में एक भी नया कॉलेज नहीं खोला गया। जिसके कारण लाखों छात्रों को दिल्ली से बाहर पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अब यह स्थिति बदलेगी और दिल्ली उच्च शिक्षा का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार की ओर से शिक्षा को सर्वांगीण विकास का मूल माना गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार निरंतर प्रयास किए जा रही है कि छात्र सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं बल्कि व्यवहारिक नेतृत्व और सामाजिक समझ से भी परिपूर्ण हों।
