पाकिस्तान पर मेहरबान ट्रम्प, सिर्फ 19% टैरिफ लगाया

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वाशिंगटन  । 01 अगस्त 25। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐलान किया है कि अमेरिका पाकिस्तान पर सिर्फ 19% टैरिफ लगाएगा। साउथ एशिया के किसी भी देश पर यह सबसे कम अमेरिकी टैरिफ होगा।

इससे पहले ट्रम्प ने अप्रैल में भारत पर 26% और पाकिस्तान पर 29% टैरिफ लगाने की बात कही थी। नए आदेश में ट्रम्प ने भारत को सिर्फ 1% और पाकिस्तान को 10% की बड़ी छूट दी है।

खास बात यह है कि ट्रम्प ने पाकिस्तान को 2 दिन में 2 राहत दी है। कल ही ट्रम्प ने पाकिस्तान के साथ ऑयल और ट्रेड डील होने के ऐलान किया था। इसके तहत अमेरिका पाकिस्तान में तेल की खोज, प्रोसेसिंग और स्टोरेज बनाने में मदद करेगा।

बीते कुछ महीनों में अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते में काफी नजदीकी आई है। पाकिस्तान ने जून में ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था। भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर के बाद ट्रम्प ने ‘आई लव पाकिस्तान’ भी कहा था।

जियो स्ट्रैटेजिक लोकेशन

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति अमेरिका के लिए बेहद अहम है। इसकी सीमाएं अफगानिस्तान और ईरान से लगती हैं। दोनों अमेरिका की विदेश नीति में ये संवेदनशील देश हैं।

अमेरिका अफगानिस्तान से निकलने के बाद भी उस क्षेत्र में निगरानी रखना चाहता है। पाकिस्तान इस दृष्टि से एक लॉजिस्टिक बेस या मॉनिटरिंग पॉइंट की तरह काम कर सकता है।

चीन की ‘बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट‘ पाकिस्तान से होकर जाती है। इससे अमेरिका को लगता है कि वह पाकिस्तान में प्रभाव बनाए रखकर चीन को संतुलित कर सकता है।

भारत को संतुलित करने की कोशिश

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और भारत के संबंध गहरे हुए हैं, लेकिन दोनों के बीच कई व्यापारिक और रणनीतिक मतभेद भी हैं। जैसे भारत का रूस से हथियार खरीदना, कृषि और डेयरी में अमेरिकी एक्सेस का विरोध और WTO पर टकराव।

ऐसे में पाकिस्तान को तरजीह देकर अमेरिका एक ‘संदेश’ देना चाहता है कि अगर भारत बहुत कठोर रवैया अपनाएगा तो अमेरिका के पास विकल्प हैं।

पाकिस्तान के जरिए चीन पर घेराबंदी

पाकिस्तान पर कम टैरिफ लगाना अमेरिका की चीन को साधने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा सकता है। चीन ने चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के जरिए पाकिस्तान में भारी निवेश कर रखा है। यह बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का सबसे अहम हिस्सा है।

अमेरिका को यह प्रोजेक्ट रणनीतिक तौर पर चुनौती लगती है, क्योंकि इससे चीन को अरब सागर तक सीधी पहुंच मिलती है। अब अमेरिका अगर पाकिस्तान से कारोबारी रिश्ते मजबूत करता है, तो वह BRI पर चीन की पकड़ को कमजोर कर सकता है या वहां अपनी मौजूदगी बनाए रख सकता है।

इसे अलावा चीन का शिनजियांग इलाका पाकिस्तान से लगा है। अमेरिका पाकिस्तान में अपने संपर्क बढ़ाकर उस इलाके की गतिविधियों पर नजर रख सकता है। इसके अलावा बलूचिस्तान में सक्रियता भी अमेरिका को चीन की ग्वादर बंदरगाह योजना पर निगरानी का मौका देती है।

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