• ‘कारगिल विजय दिवस’ के शौर्य और शूरवीरों के सम्मान में स्वास्थ्य मंत्री के नेतृत्व में निकाली गई कारगिल विजय दिवस तिरंगा यात्रा
• आतंकवाद के सरपरस्तों ने अगर भारत की तरफ आंख उठाकर देखा तो भारतीय सेना से करारा जवाब मिलेगा
नई दिल्ली। 26 जुलाई 25 । ‘कारगिल विजय दिवस’ के 26वीं सालगिरह और भारत के जांबाज शूरवीरों के सम्मान में आज दिल्ली के विकासपुरी विधानसभा इलाके में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर पंकज कुमार सिंह के नेतृत्व में से कारगिल विजय दिवस यात्रा निकाली गई। ‘कारगिल विजय दिवस’ के ऐतिहासिक मौके पर विकासपुरी विधानसभा के वीर कुंअर सिंह नगर से शुरू होकर विकासपुरी विधानसभा के अलग अलग क्षेत्रों से होकर नवादा मेट्रो स्टेशन तक निकाली गई , यात्रा में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर पंकज कुमार सिंह के साथ हजारों राष्ट्रभक्त नागरिकों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस अवसर पर सांसद कमलजीत सहरावत , महरौली विधायक गजेन्द्र यादव उत्तम नगर विधायक पवन शर्मा , मटियाला विधायक संदीप सहरावत , ज़िला प्रभारी राजकुमार फलवारिया, जिलाध्यक्ष राज शर्मा की अध्यक्षता, पूर्व जिलाध्यक्ष रमेश शोखंदा किसान मोर्चा महामंत्री अनुज त्यागी , संजय झा जिला महामंत्री पूर्वांचल मोर्चा, पूर्व निगम पार्षद सुरेश पहलवान, मदनकर चौधरी जिला अध्यक्ष पूर्वांचल मोर्चा एवं विकासपुरी विधानसभा के सभी मंडल अध्यक्ष और महामंत्री समेत विकासपुरी विधानसभा के हजारों नागरिक शामिल होकर भारत माता की जय का ऐसा जयघोष किया, जिसकी गूंज पूरी दिल्ली तक सुनाई देने लगी।

‘कारगिल विजय दिवस’ के ऐतिहासिक मौके पर जनता को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर पंकज कुमार सिंह ने कहा कि आज हम सब एक साथ मिलकर इस गौरवशाली दिन को मनाने के लिए जुटे हैं, जो भारत के गौरवशाली इतिहास का स्वर्णाक्षरों में लिखा हुआ अध्याय है।
इस अवसर पर डॉक्टर पंकज सिंह ने कहा कि 26 जुलाई 1999 को कारगिल में मिली ऐतिहासिक विजय का ये दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उन भारतीय शूरवीरों की बहादुरी, अदम्य साहस, शौर्य, बलिदान और देशभक्ति की अमिट गाथा का प्रतीक है, जो राष्ट्र की रक्षा में अपना सब कुछ न्यौछावर कर देते हैं।
आज का दिन हर भारतीय के लिए अत्यंत गर्व और सम्मान का प्रतीक है। 26 जुलाई 1999 के ही दिन वर्ष हमारे वीर जवानों ने पाकिस्तान से आए घुसपैठिए आतंकवादियों और दुश्मन देश के सैनिकों मुंहतोड़ जवाब देकर कारगिल की चोटियों पर देश की आन-बान-शान के प्रतीक तिरंगे को लहराया था।
उन्होंने भारतीय सेना को नमन करते हुए कहा कि आज जब हम इस मंच पर खड़े होकर गर्व से सिर ऊंचा उठाते हैं, तब हमें ये याद रखना चाहिए कि इस लहराते तिरंगे की हर लहर में देश के जांबाज जवानों की कुर्बानी छिपी है। जब हमारे जवानों ने फतेह पाकर टाइगर हिल की चोटी पर तिरंगा लहराया था, भारत के कट्टर दुश्मनों को साफ और सीधा संदेश था कि — भारत किसी के आगे झुकता नहीं, भारत रुकता नहीं, 60 दिनों तक चले उस संघर्ष ने सारी दुनिया को दिखा दिया था कि भारत जब युद्ध के मैदान में उतरता है, तो देश की रक्षा में चाहे जान भी क्यों न चली जाए। विजय हासिल करके ही हमारे जांबाज जवान लौटते हैं।
हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों को संबोधित करते हुए पंकज सिंह ने कहा कि गर्व से भरा आज का दिन भारतीय सेना के उसी शौर्यगाथा की कहानी को बयान करता है। हमारे पास ऐसी सैन्य ताकत है, जो सीमाओं की रक्षा ही नहीं करती, बल्कि हमें सिखाती है कि देशभक्ति के लिए कर्तव्य, बलिदान और प्रेम का क्या महत्व है।
आज का दिन हमें ये भी प्रेरणा देता है कि जब देश की बात होती है, तो हर भारतीय सैनिक बन जाता है। हमें अपने जिंदगी में भी सैनिकों के संघर्ष से बेहतर करने की प्रेरणा लेनी चाहिए और उनके त्याग और बलिदान को कभी भी नहीं भूलना चाहिए। भारत के इस पावन दिवस पर हम न केवल शूरवीरों के असाधारण साहस को याद करते हुए उनके द्वारा अपनाए गए मूल्यों, देशभक्ति, वीरता और बहादुरी को नमन करते हैं। मैं सभी वीर शहीदों को दिल से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
भारतीय सेना के अद्वितीय साहस, बलिदान और देशभक्ति का प्रतीक कारगिल युद्ध में भारतीय सेना ने 19 हजार फीट की ऊंची बर्फीली पहाड़ियों पर -10°C से -20°C के तापमान और बेहद कठिन परिस्थितियों में बाल्टिक क्षेत्र से लेकर तोलोलिंग और टाइगर हिल पर पाकिस्तानी घुसपैठियों को मुंहतोड़ जवाब देकर तिरंगे का सम्मान रखा था और पाकिस्तान में बैठे आतंकवाद के आकाओं को बता दिया था कि अगर किसी ने भारत की तरफ आंख उठाकर देखने की कोशिश की उसका क्या अंजाम होगा।

ऑपरेशन विजय की सफलता दृढ़ राजनीतिक इच्छा शक्ति रखने वाले हमारे पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के कुशल मार्गदर्शन और भारतीय सेना के शानदार नेतृत्व के चलते संभव हो सका।
डॉ पंकज कुमार सिंह ने सेना के अदम्य साहस को याद करते हुए कहा कि कारगिल युद्ध ने पूरे देश को एकजुट करने के साथ ही हर भारतीय को भावनात्मक रूप से भी जोड़ने का काम किया था। कारगिल की विजय ना सिर्फ भारतीय सेना की जीत है, बल्कि आज जवानों के हौसले और देशभक्ति का महापर्व बन चुका है। कारगिल जंग में शूरवीरों की गौरवपूर्ण जीत और तिरंगे के मान रखने के लिए जवानों की शहादत इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होकर अमर गाथा बन गई है। कारगिल की जंग में कैप्टन विक्रम बत्तरा का ‘यह दिल मांगे मोर’ का विजयी जयघोष पूरे देश गूंजता रहा।
कारगिल विजय दिवस हमें याद दिलाता है कि आज जब हम सब खुली हवा में सांस लेते हैं। जब रात को अपने-अपने घरों में चैन की नींद सो रहे होते हैं, तो देश की सीमाओं पर कोई न कोई सैनिक रात-दिन अपनी बंदूकें थामे जाग रहा होता है। जब हम पर्व-त्योहार मनाते हैं, तो कोई सैनिक हिमालय की ऊंचाई पर कड़ाके की ठंड में दुश्मन के सामने अपना सीना ताने बर्फिली वादियों में खड़ा रहता है।
हम अपने वीर जवानों की शहादत की कीमत जिंदगी में कभी चुका नहीं सकते हैं, लेकिन हम आज के दिन वीर सपूतों को याद करके, नमन करके शहीदों का सम्मान करके, उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतार कर सच्ची श्रद्धांजलि जरूर दे सकते हैं। आइए हम सब मिलकर उन अमर शहीद जवानों को नमन और प्रतिज्ञा करें जो वीरभूमि से लौटे नहीं, जंग भीके मैदान में अपनी शहादत देकर अमर हो गए…जिनकी कहानियां सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि हर भारतीय के दिलो-दिमाग में बसी हुई हैं। हम सब मिलकर ये संकल्प ले कि देश को महान बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
