बेंगलुरु में दुकानों पर ‘नो UPI’ के बोर्ड लगे

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कर्नाटक । 24 जुलाई 25 । कर्नाटक के बेंगलुरु में 22 हजार से ज्यादा छोटे-मझोले व्यापारी राज्य सरकार की तरफ से भेजे गए GST नोटिस से परेशान हैं। इनमें से करीब 9 हजार दुकानदारों को चार साल के गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) बकाया भुगतान के नोटिस मिले हैं।

कॉमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट ने दूध, फल-फूल, सब्जी बेचने वालों को भी 2 लाख तो किसी को 90 लाख रुपए तक के नोटिस भेज दिए हैं। इससे नाराज छोटे दुकानदारों ने पूरे बेंगलुरु में UPI पेमेंट बंद कर दिया है। वे सिर्फ कैश पेमेंट ले रहे हैं। उन्होंने दुकान पर ‘ओनली कैश’ के पर्चे चिपका लिए हैं।

इसके बाद कर्नाटक सरकार हरकत में आई। बुधवार देर शाम व्यापारिक संगठनों, कर विभाग के अधिकारियों को बुलाया गया। तीन घंटे मंथन के बाद CM सिद्धारमैया ने बताया कि बीते 2-3 साल का टैक्स नहीं देना होगा। बशर्ते सभी व्यापारी GST अधिनियम के तहत रजिस्ट्रेशन कराएं।

कॉमर्शियल टैक्स विभाग ने छोटे दुकानदारों को चार साल के जीएसटी बकाया के नोटिस भेजे हैं। बकाए में कारोबार के टर्नओवर में उनके निजी UPI लेनदेन भी शामिल हैं। व्यापारी इसी से नाराज हैं।

CM का दावा- 25 जुलाई को बुलाया बेंगलुरु बंद वापस CM का दावा है कि व्यापारिक संगठनों ने 25 जुलाई को बुलाया बेंगलुरु बंद वापस ले लिया है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया कि UPI से पेमेंट लेना शुरू होगा या नहीं।

दूसरी तरफ, छोटे कारोबारियों के संगठन कर्नाटक स्टेट कार्मिका परिषद के अध्यक्ष रवि शेट्टी ने बुधवार देर रात बताया कि 25 जुलाई को बंद होगा। फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन भी करेंगे। हम बैकफुट पर नहीं जाएंगे।

जो GST दायरे में नहीं, उन्हें भी 90 लाख का नोटिस इलेक्ट्रॉनिक सिटी इलाके के मीट कारोबारी मोहम्मद अराफात का केस दिलचस्प है। वो बताते हैं कि वह GST के दायरे में नहीं आते, फिर भी उन्हें 91 लाख का नोटिस मिला है। पहली बार धंधा बंद करने की नौबत आ गई है।

भास्कर ने उन व्यापारियों से बात की, जिन्हें 40 लाख से ज्यादा के नोटिस भेजे गए हैं। एचएसआर क्षेत्र में बेकरी मालिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें 43 लाख का नोटिस मिला है। इसलिए ऑनलाइन पैसा लेना बंद कर दिया है। मैं ब्रेड बेचता हूं, मुश्किल से घर चलता है। यदि नोटिस रद्द नहीं हुआ तो धंधा बंद करना होगा।

टैक्सपेयर्स की संख्या भी दोगुनी से ज्यादा बढ़ी

GST लागू होने के वक्त 2017 में रजिस्टर्ड टैक्सपेयर्स की संख्या 65 लाख थी, जो अब बढ़कर 1.51 करोड़ से ज्यादा हो गई है। इससे सरकार का टैक्स बेस भी मजबूत हुआ है।

सरकार का कहना है कि GST लागू होने के बाद टैक्स कलेक्शन और टैक्स बेस दोनों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। इससे देश की फिस्कल पोजिशन मजबूत हुई है और टैक्स सिस्टम ज्यादा पारदर्शी और आसान बना है।

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