डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया की रोकथाम जागरूकता से ही संभव है – डॉ तारिक थमास

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एनडीएमसी ने डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया की रोकथाम पर एक संवाद- गोष्ठी आयोजित की ।

नई दिल्ली । 22 जुलाई 2025। जन स्वास्थ्य और स्वच्छता की सुरक्षा के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने आज एनडीसीसी कन्वेंशन सेंटर, जय सिंह रोड, नई दिल्ली में वेक्टर जनित रोगों – डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया – की रोकथाम और नियंत्रण पर एक व्यापक संवाद गोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य निगरानी कार्यकर्ताओं और उनके सुपरवाइजर कर्मचारियों के साथ-साथ बागवानी विभाग को संवेदनशील बनाना, उनकी तकनीकी समझ को मजबूत करना और इन रोगों के प्रसार को रोकने के लिए ठोस जमीनी उपायों को अपनाना था।

इस संवाद गोष्ठी का उद्घाटन एनडीएमसी के सचिव – डॉ. तारिक थॉमस ने किया, जिन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वेक्टर जनित रोगों से निपटने की कुंजी रोकथाम, समय पर उपचारात्मक कार्रवाई और व्यापक जागरूकता में निहित है। उन्होंने रोगवाहकों के जीवनचक्र को समझने और प्रभावी रोकथाम रणनीतियों को लागू करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

डॉ. थॉमस ने एनडीएमसी के स्कूलों, कॉलेजों, कार्यालयों, सार्वजनिक स्थानों, बाज़ारों और आवासीय परिसरों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि इन अभियानों में नुक्कड़ नाटक, सूचना एवं संचार सामग्री का वितरण, मोबाइल वैन से उद्घोषणा अभियान, एसएमएस आउटरीच और मीडिया व सोशल मीडिया पर सक्रिय भागीदारी शामिल होनी चाहिए ताकि नागरिकों को निवारक उपायों के बारे में अच्छी जानकारी समय पर मिल सके।

डॉ. थॉमस ने कहा, “इस इंटरैक्टिव कार्यक्रम का उद्देश्य हमारे निगरानी कर्मचारियों और सुपरवाइजरी टीमों को सार्वजनिक और निजी दोनों परिसरों में लार्वा-रोधी उपाय करने, गहन निरीक्षण करने, फॉगिंग करने और अन्य उपायों जैसी गतिविधियाँ करने के लिए सशक्त बनाना है, जिससे मच्छरों के प्रजनन को कम किया जा सके।”

इस गोष्ठी में संवाद सत्र के दौरान, दिल्ली नगर निगम की क्षेत्रीय महामारी विज्ञानी – डॉ. अदिति ने मच्छरों की प्रजातियों में अंतर करने, डेंगू के लिए ज़िम्मेदार एडीज़ मच्छरों की पहचान करने, उनके प्रजनन की आदतों और जीवनचक्र को समझने के साथ-साथ इन बीमारियों के लक्षणों और निवारक उपायों को पहचानने के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की और प्रतिभागियों के साथ विचारों का आदान प्रदान भी किया।

अन्य विशेषज्ञों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि डेंगू और चिकनगुनिया का पूरी तरह से उन्मूलन नहीं किया जा सकता, लेकिन मच्छरों के प्रजनन को नियंत्रित करना सबसे प्रभावी रणनीति है क्योंकि इन बीमारियों के लिए वर्तमान में कोई टीका उपलब्ध नहीं है। उन्होंने दोहराया कि “रोकथाम इलाज से कहीं ज़्यादा आसान है।”

एनडीएमसी की एमओएच – डॉ. शकुंतला श्रीवास्तव ने इस अवसर पर बताया कि इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अलावा सिविल एवं बागवानी विभागों के 250 से ज़्यादा स्वच्छता निरीक्षकों, सहायक निरीक्षकों, निगरानी कर्मचारियों और क्षेत्रीय कर्मचारियों ने इस संगोष्ठी सत्र में सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने आगे कहा, “हमें विश्वास है कि अब उन्नत तकनीकी ज्ञान के साथ, प्रतिभागी नई दक्षता और समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे।”

इससे पहले, एनडीएमसी ने स्कूल शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, छात्रों और सीपीडब्ल्यूडी, रेलवे, राज्य अतिथि गृहों और पाँच सितारा होटलों के प्रतिनिधियों के लिए भी इसी तरह के प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिससे नई दिल्ली में वेक्टर-जनित और जल-जनित रोगों के नियंत्रण के लिए इसकी समग्र रणनीति और मज़बूत हुई है।

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