• मोदी के “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत माताओं की स्मृति में पौधारोपण किया गया •इस विशेष स्थल को नाम दिया गया “न्याय वाटिका”
• “दिल्ली में चल रही मेगा प्लांटेशन ड्राइव न्यायपालिका का नैतिक समर्थन पाकर अब और मजबूत हो गई है,” — मनजिंदर सिंह सिरसा
नई दिल्ली, 19 जुलाई 2025 । देश में पहली बार, सुप्रीम कोर्ट के 20 माननीय न्यायाधीशों ने माननीय मुख्य न्यायाधीश के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत वृक्षारोपण किया। यह आयोजन वन महोत्सव 2025 के तहत दिल्ली सरकार द्वारा पीबीजी ग्राउंड, दिल्ली रिज क्षेत्र में आयोजित किया गया था।
इस अवसर पर वृक्षारोपण स्थल को “न्याय वाटिका” नाम दिया गया — जो न केवल न्यायपालिका की संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि भावनात्मक रूप से मातृत्व और पीढ़ियों की ज़िम्मेदारी का भी एहसास दिलाता है।
कार्यक्रम में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, जस्टिस भूषण रामकृष्ण गंवई जी, जस्टिस सूर्यकांत जस्टिस विक्रमनाथ , जस्टिस एम.एम. सुंदरेश , जस्टिस पी. . नरसिम्हा जी, जस्टिस दीपांकर दत्ता , जस्टिस पंकज मित्तल , जस्टिस संजय करोल , जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह , जस्टिस के.वी. विश्वनाथन , जस्टिस एस.वी.एन. भाटी , जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह , जस्टिस संदीप मेहता , जस्टिस पी.बी. वराले , जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह , जस्टिस मनमोहन , जस्टिस जॉयमाला बागची , जस्टिस एन.वी. अंजरिया , जस्टिस विजय विश्नोई और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर ने ‘ एक पेड़ मा के नाम’ अभियान में हिस्सा लेकर वृक्षारोपण किया।

मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई ने अपने संबोधन में कहा:“मैं दिल्ली सरकार और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए बधाई देता हूँ। सुप्रीम कोर्ट और देश की तमाम अदालतें हमेशा से पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाती रही हैं। 1996 का टी.एन. गोडावर्मन केस एक ऐतिहासिक फ़ैसला था, जिसमें पहली बार ‘वन’ की परिभाषा दी गई और बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई पर रोक लगी।”
“अक्टूबर आते ही दिल्ली में प्रदूषण को लेकर चिंता की स्थिति बन जाती है।इस दौरान निर्माण कार्य पर रोक लगने से कई बार हज़ारों मज़दूरों की आजीविका पर असर पड़ता है। इसका स्थायी समाधान ज़रूरी है। मुझे खुशी है कि दिल्ली सरकार इनोवेटिव तकनीक, जागरूकता और लोगों की भागीदारी के ज़रिए इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। मेरी शुभकामनाएं दिल्ली सरकार के साथ हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि 2027 तक दिल्ली में कचरे के पहाड़ों को हटाने का जो लक्ष्य तय किया गया है, वह सराहनीय है और यह भी उम्मीद जताई कि एक दिन दिल्ली की पर्यावरणीय पहलें दक्षिण कोरिया की तरह दुनिया भर में मिसाल बनेंगी।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा “20 सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों द्वारा अपनी माँ की स्मृति में पेड़ लगाना अपने आप में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक क्षण है। यह केवल एक पर्यावरणीय कदम नहीं, बल्कि भावनात्मक और हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। जैसे माननीय मुख्य न्यायाधीश ने कहा, पेड़ लगाना अब हमारी साझा ज़िम्मेदारी और मूल कर्तव्य बन गया है।”

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली में सिर्फ हरियाली नहीं, बल्कि हरित जीवन-मूल्य भी विकसित हो रहे हैं। मुझे विश्वास है कि ‘न्याय वाटिका’ आने वाले वर्षों में न्याय और प्रकृति के संगम का प्रतीक बनेगी।”
इससे एक दिन पहले इसी स्थान पर दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय, एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और अन्य वरिष्ठ न्यायमूर्तियों ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ वृक्षारोपण किया था।
वन महोत्सव 2025 के तहत यह अभियान दिल्ली में चल रहे अब तक के सबसे बड़े पौधारोपण प्रयासों में से एक है, जिसका लक्ष्य इस वर्ष 70 लाख पेड़ लगाना है। यह दिल्ली पर्यावरण कार्ययोजना का एक प्रमुख हिस्सा है, जिसमें सड़क धूल नियंत्रण, कचरा प्रबंधन, बायोमाइनिंग, निर्माण स्थलों की निगरानी और नागरिकों की भागीदारी शामिल है
