- बच्चों के साथ साथ उनके अभिभावकों का भी सम्मान होना चाहिए
- आशीष सूद ने विवेकानंद स्कूल में ‘फ्यूचर लैब’ का शुभारंभ कर मेधावी छात्रों को सम्मानित भी किया।
नई दिल्ली । 12 जुलाई 25 । दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने आज विवेकानंद स्कूल, आनन्द विहार में आयोजित एक समारोह में बोर्ड परीक्षाओं, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विशेष रूप से सम्मानित किया। साथ ही स्कूल की नवीनतम तकनीकी पहल ‘फ्यूचर लैब’ का भी औपचारिक उद्घाटन किया।
इस अवसर पर स्कूल के संरक्षक योग ध्यान आहूजा, चेयरमैन प्रद्युम्न आहूजा, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ एवं अभिभावक उपस्थित थे।


सम्मान समारोह में उपस्थित छात्रों, शिक्षक, और अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए शिक्षा मंत्री सूद ने कहा की यह सिर्फ एक शैक्षिक आयोजन नहीं, बल्कि एक जीवंत संदेश है जहां आस्था, प्रतिभा और प्रगति एक ही मंच पर एकत्र हों, वहाँ एक नए भारत की नींव रखी जा रही होती है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों को केंद्र में रखते हुए युवाओं को तीन अनमोल संदेश दिए जैसे जिज्ञासा-अपने भीतर उठने वाले सवालों को कभी दबने न दें। साहस- चुनौतियों से भागो मत, उनका डटकर सामना करो। शारीरिक और मानसिक बल सशक्त शरीर और दृढ़ मन ही सच्चे राष्ट्रनिर्माता बना सकते हैं।


उन्होंने यह भी कहा कि जैसे स्वामी विवेकानंद ने 1893 में शिकागो में भारत की आत्मा को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया था, उसी भावना को आज के विद्यार्थी फिर से जीवंत कर सकते हैं।अगर वे आत्मविश्वास, परिश्रम और निष्ठा के साथ अपने लक्ष्य को साधें।
‘फ्यूचर लैब’ का उद्घाटन करते हुए श्री सूद ने कहा कि यह प्रयोगशाला केवल तकनीक सीखने की जगह नहीं, बल्कि छात्रों की कल्पनाशीलता, नवाचार और जिज्ञासा को पंख देने का माध्यम बनेगी। हमें सिर्फ टेक्नोलॉजी के उपभोक्ता नहीं, टेक्नोलॉजी के सृजनकर्ता बनाना है।
उन्होंने कहा की स्कूल का यह मंच सभी छात्रों के लिये आत्म-नियंत्रण, अनुशासन और निरंतर परिश्रम का केन्द्र है।

आशीष सूद ने सम्मान प्राप्त सभी मेधावी छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार रहने के लिए संकल्पित किया। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व के अन्य विकसित देशों के समान नई नई तकनीक का प्रयोग कर आगे बढ़ रहा है । कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI ) इसी का परिणाम है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के गलत प्रयोग की जगह उसको सही ढंग से अपना कर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने को भी कहा।
कार्यक्रम के समापन पर शिक्षा मंत्री ने छात्रों को भारत के भविष्य के निर्माता बताते हुए कहा 2047 में जब भारत अपनी आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब यही विद्यार्थी उस विकसित भारत के वास्तुकार होंगे। शिक्षा ही वह लॉन्चपैड है जो उन्हें इस उड़ान के लिए तैयार करता है।
