- नए कानूनों का उद्देश्य भारत को औपनिवेशिक सोच से मुक्त कर एक न्यायोन्मुखी व्यवस्था स्थापित करना है- रेखा गुप्ता
नई दिल्ली । 9 जुलाई 2025 । नए आपराधिक कानूनों के सफलतापूर्वक एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में नई दिल्ली में आयोजित ‘न्याय प्रणाली में विश्वास का स्वर्णिम वर्ष’ कार्यक्रम में आयोजित प्रदर्शनी का आज भारत मंडपम, प्रगति मैदान में भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर भारत सरकार के गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, कैबिनेट मंत्री आशीष सूद, मुख्य सचिव धर्मेंद्र सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
दिल्ली सरकार के गृह विभाग द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्देश्य नए आपराधिक कानूनों जिनमे भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के प्रति नागरिकों में जागरूकता बढ़ाना था। ये कानून 1 जुलाई 2024 से लागू हुए हैं और दशकों पुराने औपनिवेशिक कानूनों की जगह अब एक समयबद्ध और नागरिक-केंद्रित न्याय प्रणाली देश में स्थापित की गई है।
इस अवसर पर गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारतीय सरकार ने तीन प्रगतिशील कानूनों ने पारंपरिक दंडात्मक व्यवस्था को छोड़कर न्याय पर केंद्रित मंच तैयार किया है, जिसमें तकनीकी नवाचार के माध्यम से त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी न्याय सुनिश्चित किया जाता है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर सख्त समय सीमा तय की गई है—जघन्य अपराध मामलों में 60 दिनों में आरोप तय और 45 दिनों में सुनवाई पूरी करने का कानून में प्रावधान किया गया है। नित्यानंद राय ने कहा कि यह कानून अब केवल सजा देने का नहीं बल्कि न्याय देने का माध्यम है। तीनों कानून जनता को न्याय में विश्वास दिलाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, जिसमें भ्रष्टाचार रहित, समयबद्ध और तकनीकी-सक्षम प्रणाली शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि यह परिवर्तन केवल कानूनी बदलाव नहीं है, बल्कि एक सामाजिक विश्वास और सुरक्षा निर्माण की पहल है। इससे न केवल कानूनी शिक्षा और क्षमता का विस्तार हुआ है बल्कि देश में न्याय प्रक्रिया का स्वरूप ही बदल गया है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि वर्ष 1856 से लागू औपनिवेशिक कानूनों को आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी भारत ढोता रहा। ये कानून उस मानसिकता से बनाए गए थे, जिसमें न्याय नहीं बल्कि भारतीयों को गुलाम समझा जाता था और उनके साथ दंडात्मक व्यवहार किया जाता था। उन्होंने कहा कि सरकारें आती-जाती रहीं, लेकिन किसी ने यह मूल प्रश्न नहीं उठाया कि क्या ये कानून वास्तव में भारत और इसके नागरिकों के लिए उपयुक्त हैं?
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने कानूनों में बदलाव मुख्यतः अपने राजनीतिक हितों, सत्ता को बनाए रखने और वोट बैंक को मजबूत करने के लिए किए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व की व्यवस्थाएं न्याय पर नहीं, बल्कि सजा पर केंद्रित थीं। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाए गए नए आपराधिक न्याय सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि यह परिवर्तन सिर्फ दंड देने की प्रक्रिया को नहीं, बल्कि न्याय सुनिश्चित करने के विचार को लेकर आया है। नए कानूनों का उद्देश्य भारत को औपनिवेशिक सोच से मुक्त कर एक न्यायोन्मुखी व्यवस्था स्थापित करना है।

मुख्यमंत्री ने भारत की नई आपराधिक न्याय प्रणाली को ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बताते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में यह प्रणाली वर्षों की मेहनत, गहन अध्ययन, विशेषज्ञों की राय और समर्पित प्रयासों के बाद तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि नए कानून देश के 140 करोड़ नागरिकों को न्याय में विश्वास दिलाने की मंशा से बनाए गए हैं और पूरे देश में उन्हें तेज़ी से लागू भी किया गया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नित्यानंद राय का आभार जताते हुए उन्हें दिल्ली के लिए “मार्गदर्शक व साथी” बताया।
