अमेरिका की टैरिफ नीति से भारत को फायदा

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वाशिंगटन । 10 जुलाई 25 । अमेरिका की नई टैरिफ नीति भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका भारत पर तय टैरिफ से कम टैरिफ लागू कर सकता है।

वहीं दूसरी तरफ इंडो-पैसिफिक के कई देशों को भारी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। इससे भारत में विदेशी निवेश के अवसर बढ़ सकते हैं और देश की मैन्युफेक्चरिंग क्षमता को मजबूती मिल सकती है।

अरिहंत कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक भारत कई अन्य एशियाई देशों की तुलना में अमेरिका के नए टैरिफ सिस्टम में बेहतर स्थिति में है।

इससे भारत के पास निवेश को आकर्षित करने और मैन्युफेक्चरिंग बह बनने के लिए बड़ा मौका है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कंबोडिया और वियतनाम जैसे देशों को जहां अधिक टैरिफ झेलना पड़ रहा है।

भारत को अब तक टैरिफ नोटिस नहीं भेजा गया

ट्रम्प ने 8 जुलाई को जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग को औपचारिक लेटर भेजकर टैरिफ की जानकारी दी थी। बाद में मलेशिया और कजाकिस्तान को भी इसी तरह के लेटर भेजे गए।

हालांकि भारत को अभी तक ऐसा कोई लेटर नहीं मिला है। रिपोर्ट में इसे भारत के लिए अच्छा संकेत बताया गया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अमेरिका भारत को स्ट्रैटजिक पार्टनर होने के नाते रियायत दे सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की इस नई टैरिफ नीति के चलते भारत की स्थिति बाकी देशों की तुलना में मजबूत है। इसका फायदा उठाकर भारत ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बन सकता है।

भारत की ‘चाइना+1’ रणनीति, पीएलआई योजनाएं और ट्रेड डील्स की वजह से भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, ऑटो और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने का मौका देगा।कता है।

ट्रम्प की नई टैरिफ लिस्ट में 14 देशों पर भारी टैरिफ

बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 14 देशों पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा की। इनमें कई देशों पर 25% से लेकर 50% तक के टैरिफ लगाए गए हैं।

UK और EU से ट्रेड एग्रीमेंट का फायदा मिला

UK और EU के साथ व्यापार समझौते ने भारत की स्थिति को और मजबूत किया है।

रिपोर्ट में मई 2025 में भारत-ब्रिटेन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के साइन होने और यूरोपीय संघ के साथ जारी बातचीत का भी जिक्र है। इन दोनों व्यापार समझौतों ने भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का मौका दिया है।

रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि अमेरिका अपनी ‘री-शोरिंग पॉलिसी’ के तहत सप्लाई चेन को फिर से घरेलू जमीन पर लाने के लिए लगा हुआ है। ट्रम्प खासतौर पर सेमी-कंडक्टर्स, रक्षा उत्पाद और फार्मास्युटिकल्स सेक्टर पर नजर बनाए हुए हैं।

ऐसे में अगर ट्रम्प इन सेक्टर में अपनी नीतियों को लेकर सख्त रुख अपनाते हैं तो भारत को उम्मीद से कम फायदा मिलेगा।

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