- यह पाठ्यक्रम हमारे गुरुओं के साहस को समर्पित एक सभ्यतागत श्रद्धांजलि है – मंजिन्दर सिंह सिरसा
• पाठ्यक्रम को गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी पर्व से पहले स्वीकृति मिली है
• मंत्री ने देशभर के विश्वविद्यालयों से अपील की है कि वे दिल्ली विश्वविद्यालय की इस पहल से प्रेरणा लें
नई दिल्ली । 6 जुलाई, 25 । दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने आज दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा “भारतीय इतिहास में सिख शहादत (1500–1765)” से जुड़े स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने इसे सिख समुदाय की न्याय, स्वतंत्रता और मानव गरिमा के लिए अडिग संघर्ष को सम्मान देने वाला एक ऐतिहासिक कदम बताया।
यह पहल ऐसे समय में आई है जब देश सिखों के नवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत दिवस की तैयारियाँ कर रहा है — जिन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
इससे पहले मंत्री ने सिख समाज के वरिष्ठ सदस्यों, बुद्धिजीवियों और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की थी, जिसमें गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के उपलक्ष्य में आयोजन कैसे हो, इस पर सुझाव मांगे गए थे। उसी बैठक में यह सुझाव प्रमुखता से सामने आया था कि सिख गुरुओं की शिक्षाओं और बलिदानों पर एक समर्पित विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम शुरू किया जाए। दिल्ली विश्वविद्यालय की यह पहल उसी परामर्श प्रक्रिया का सकारात्मक और समयानुकूल परिणाम है।
मंत्री ने कहा, “यह सिर्फ एक पाठ्यक्रम नहीं है, यह हमारे गुरुओं को दी गई एक सभ्यतागत श्रद्धांजलि है — खासकर गुरु तेग बहादुर जी को, जिनका संदेश आज भी हमें सत्य के पक्ष में खड़े होने और दूसरों के अधिकारों की रक्षा करने की प्रेरणा देता है।”
यह पाठ्यक्रम छात्रों को सिख इतिहास, पहचान और बलिदान से परिचित कराएगा, जिसमें समाज सेवा, नेतृत्व और आध्यात्मिक साहस को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा। इसके अंतर्गत फील्ड विज़िट, आर्काइव रिसर्च और डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग्स जैसी गतिविधियाँ भी होंगी ताकि छात्र-छात्रायें सिख इतिहास को गहराई से समझ सकें।
“बल हुआ बंधन नहीं, गुरु तेग बहादुर बोले।
भय काहू को देत नहिं, नहिं भय मानत आनि”
मंत्री ने कहा, “गुरु साहिब के ये अमर वचन आध्यात्मिक स्वतंत्रता, साहस और गरिमा की प्रेरणा हैं। आज के समय में गुरु साहिब की विरासत हमें बिना भय और बिना द्वेष के सत्य के लिए खड़े रहने की सीख देती है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी विशेष धन्यवाद किया, जिनके नेतृत्व में सिख इतिहास और विरासत को देश और दुनिया में नया सम्मान मिला है। “वीर बाल दिवस से लेकर सिख योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और अब इस शैक्षणिक पाठ्यक्रम तक — मोदी जी ने सिख इतिहास को गर्व के साथ मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया है।”
मंत्री ने देश के अन्य विश्वविद्यालयों, खासकर पंजाब के विश्वविद्यालयों, से अपील की कि वे भी ऐसे पाठ्यक्रम शुरू करें ताकि सिख मूल्यों — न्याय, सेवा और बलिदान — को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा सके।
उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम नई पीढ़ी को हमारे गुरुओं के निडर और समावेशी आदर्शों के अनुसार जीने की प्रेरणा देगा।
